राजीव गांधी सेवा केंद्रों में अनियमितता मिलने पर सीज किए गए 178 ग्राम प्रधान के खातों में से 37 के खाते बहाल कर दिए गए हैं। यह बहाली प्रधानों द्वारा रिकवरी की धनराशि जमा करने पर हुई है।
जिले में 270 गांव में 27 करोड़ की लागत राजीव गांधी सेवा केंद्र बनाए जाने थे। अधिकांश केंद्रों के निर्माण में काफी गोलमाल किया गया था। इसमें तत्कालीन डीएम ओएन सिंह ने जांच कराए तो 178 राजीव गांधी सेवा केंद्रों में गड़बड़ी मिली थी। उन्होंने इन सभी गांव के प्रधानों के खाते सीज कर गबन की धनराशि का आधा भाग प्रधान से और आधा भाग ग्राम पंचायत अधिकारी से रिकवरी के आदेश थे।
खाते सीज होने से प्रधानों में हड़कंप मच गया था। खुद की स्थिति खराब होते देख प्रधानों ने रिकवरी की धनराशि जमा करना शुरू कर दिया। अब तक 37 ग्राम प्रधानों ने रिकवरी की धनराशि जमा कर दी है। जिन प्रधानों ने रिकवरी की धनराशि जमा कर दी उनके सीज बैंक खातों को बहाल करने के आदेश डीएम मासूम अली सरवर ने कर दिए हैं।
उपायुक्त मनरेगा डॉ. शिवाकांत ने बताया कि रिकवरी जमा करने वाले प्रधानों के खाते बहाल कर दिए गए हैं। अभी कुछ और प्रधान धनराशि जमा कर रहे हैं। यदि धनराशि जमा होती है तो बाकी के खाते भी बहाल कराए जांएगे।
जिम्मेदारों पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई
राजीव गांधी सेवा केंद्रों में लंबे समय से जांच और कार्रवाई चल रही है लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसमें सिर्फ प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव को ही दोषी बनाया गया है। सवाल उठता है कि क्या इस गड़बड़ी के लिए केवल प्रधान और सचिव ही जिम्मेदार हैं। 27 करोड़ के काम की नियमित निरीक्षण, उसकी प्रगति रिपोर्ट आदि देने की जिम्मेदारी भी संबंधित खंड विकास अधिकारी एवं अन्य उच्चाधिकारियों की बनती हैं। यदि काम नहीं हो रहा था तो इन जिम्मेदार अफसरों ने अपनी कोई रिपोर्ट, निरीक्षण अथवा कार्रवाई क्यों नहीं की। लेकिन खुद को बचाने के लिए पतली गर्दन पकड़कर अधिकारियों ने एक ओर खुद को बचा लिया साथ ही रिकवरी जमा कराकर दोषियों को भी निर्दोष बना दिया।