अदालत में पूरनपुर पुलिस के मूर्ति प्रस्तुत न कर पाने से हुआ खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर (पीलीभीत)। पूरनपुर थाने से भगवान बुद्ध की अष्टधातु की प्राचीन मूर्ति गायब होने का खुलासा होने के बाद थाने के तत्कालीन हेड मोहर्रिर अमरनाथ यादव और उनके बाद मालखाना प्रभारी रहे छह अन्य हेड मोहर्रिरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
पूरनपुर थाना पुलिस ने वर्ष 2006 में चोरी की मूर्ति बरामद की थी। इसका मुकदमा अदालत में विचाराधीन है, पुलिस को बरामद मूर्ति अदालत में पेश करनी है। कई बार कहने के बाद भी जब मूर्ति प्रस्तुत नहीं की गई तो अदालत की तरफ से शासन को पत्र लिखा गया। इसके बाद पिछले कई दिनों से थाने के मालखाने के बंद कमरों में मूर्ति को ढूंढा गया लेकिन नहीं मिली।
इसके बाद कोतवाल आशुतोष रघुवंशी की ओर से तत्कालीन मालखाना प्रभारी रहे हेड मोहर्रिर अमरनाथ यादव और अन्य के खिलाफ गबन की रिपोर्ट दर्ज की गई है। वर्तमान में तैनात मालखाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह को चार्ज हस्तांतरण के दौरान मूर्ति नहीं मिली थी। इसकी उन्होंने रिपोर्ट दी है।
दर्ज एफआईआर के मुताबिक आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला से वर्ष 2009 में परीक्षण के बाद मूर्ति पूरनपुर थाने वापस लाई गई। जनरल डायरी (जीडी) में इस वापसी का तस्करा भी दर्ज हुआ था। उसके बाद से अब तक सात हेड मोहर्रिर बदल गए, लेकिन मूर्ति का कोई जिक्र नहीं है। संवाद
वर्ष 2009 से 2022 तक जो भी हेडमोहर्रिर रहे हैं उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें कई सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वर्तमान मालखाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने मूर्ति नहीं मिलने की रिपोर्ट दी है, इसलिए उन्हें नामजद नहीं किया गया है।
-आशुतोष रघुवंशी, इंस्पेक्टर पूरनपुर
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सख्त हुई अदालत तो रिपोर्ट दर्ज कर गर्दन बचाई
वर्ष 2009 से 2022 तक बदल गए सात हेडमोहर्रिर
पूरनपुर। अदालत बार-बार कहती रही कि भगवान बुद्ध की बरामद मूर्ति को अदालत में पेश किया जाए। पुलिस मामले को टालती रही, क्योंकि मालखाने से मूर्ति गायब थी। जब अदालत ने सख्ती दिखाते हुए मुख्यमंत्री कार्यलय को पत्र लिखा तो अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए सात हेड मोहर्रिरों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी। हकीकत यह है कि मूर्ति गायब होने की बात ऊपर से नीचे तक मालूम थी।
मालखाने के हिसाब-किताब का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब दस सालों में मालखाने का चार्ज ही पूरी तरह से हस्तांरित नहीं हो पाया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि अष्टधातु निर्मित गौतमबुद्ध की मूर्ति के गायब होने की बात काफी दिनों से स्टाफ को मालूम थी। लेकिन कोई बोला नहीं । मामला दबा ही रहता अगर अदालत इस मामले में शासन को पत्र न लिखती। शासन इस मामले में कार्रवाई करता, इससे पहले ही अफसरों ने कार्रवाई के डर से जिला स्तर पर रिपोर्ट दर्ज कर दी। जबकि यह कार्रवाई पहले भी हो सकती थी। फिलहाल मूर्ति कोतवाली से कौन ले गया, इसका जवाब मिलना अब भी मुश्किल ही है।
कोतवाल आशुतोष रघुवंशी ने बताया कि वर्ष 2009-10 में मालखाना इंचार्ज अमरनाथ यादव, 2011 में राजेश कुमार व सुरेंद्र पाल सिंह, 2012 में सोमपाल, 2013 में दुर्विजय सिंह, 2015 में चमन सिंह, 2015 से 2022 तक राजकुमार श्रीवास्तव के पास चार्ज रहा। 2022 में हेड मोहर्रिर वीरेंद्र सिंह के पास मालखाने का चार्ज आ गया। इनमें से 2013 में कोतवाली में तैनात हेड मोहर्रिर दुर्विजय सिंह का नाम सिख एनकाउंटर के चर्चित मामले में शामिल था। अदालत के आदेश पर दुर्विजय सिंह को जेल भेज दिया गया था। इसके बाद कई लोगों को मालखाने का चार्ज देने की कोशिश की गई लेकिन सभी हेड मोहर्रिर चार्ज लेने से कतराते रहे। तब कमेटी गठित कर चार्ज दूसरे मालखाना इंचार्ज को दिया गया था। संवाद
2013 में बदला था मालखाने चार्ज
कोतवाली के मालखाने में दो हजार से अधिक माल दाखिल हैं। वर्ष 2013 के बाद अब तक पूरा चार्ज ही दूसरे हेड मोहर्रिर को हस्तांतरित नहीं हो सका। दरअसल कुछ हेडमोहर्रिर सेवानिवृत्त हो गए, वे चार्ज हस्तांतरण करने आए ही नहीं। कुछेक की मृत्यु होने की बात भी कही जा रही है। अगर सही से जांच की जाए, तब और भी माल गायब मिलने की जानकारी सामने आ सकती है। मौजूदा मालखाना इंचार्ज वीरेंद्र सिंह का कहना है कि माल के हस्तांतरण के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है। 2013 से अब तक पूरा माल हस्तांतरण नहीं हो पाया है। संवाद