प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक (बाघ परियोजना) एके द्विवेदी ने कहा टाइगर रिजर्व से सटे अमरिया तहसील के खेतों, नदी के किनारे उगी झाड़-झंकाड़ों में पिछले कई सालों से विचरण कर रहे बाघों को वापस पीलीभीत टाईगर रिजर्व में छोडने से भारतीय वन्यजीव अनुसंधान संस्थान ने स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया है। उन्हों ने कहा कि इस क्षेत्र में पांच बाघों की पुष्टि हो रही है। हाल फिलहाल इस क्षेत्र में एक वॉच टॉवर स्थापित कराया जाएगा। साथ ही इन पांचों बाघों को पकड़ कर किसी तरह दुधवा पार्क के जंगलों में छोड़ने की तैयारी की जाएगी।
एके द्विवेदी शनिवार को स्थानीय पीलीभीत टाईगर रिजर्व में विश्व बाघ दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। सन 2012 से पीलीभीत टाईगर रिजर्व से निकल अमरिया क्षेत्र अस्थाई अड्डृा बना चुके बाघों के बारे में उनसे वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि अभी तक वहां बाघ-मानव जीवन संघर्ष की बड़ी घटना नहीं हुई है। यदि ऐसा हुआ तो यह बाघों के लिए बहुत बडा खतरा होगा। इस लिए इस संबंध में भारतीय वन्यजीव अनुसंधान संस्थान को एक पत्र वन संरक्षक ने लिखा था। इसके प्रतिउत्तर में 19 जुलाई को भारतीय वन्यजीव अनुसंधान संस्थान के डीन फैक्लटी वाइल्ड लाइफ साइंस डॉ.जीएस रावत ने स्पष्ट किया हैं कि अमरिया से बाघों को वापस पीलीभीत टाईगर रिजर्व नहीं भेजा जाना चाहिए। क्योंकि वहां बाघों की संख्या अच्छी खासी है पर्याप्त स्थान न हो पाने के कारण यह बाघ वहां से आए हैं। इसलिए इनको ट्रेंकुलाइज कराकर दुधवा नेशनल पार्क में छोडा जा सकता है।
उनको बताया कि अमरिया क्षेत्र में मौजूद बाघों को अब दुधवा में सिफ्ट करने के लिए उन्हें पकड़ने आदि के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इसके लिए स्थानीय अधिकारियों से भूमिका तैयार करने को कहा गया है। जैसे ही तैयारी पूरी हो जाएगी वैसे ही उन बाघों को पकड़ कर दुधवा के जंगल में उन्हें छोड़ने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
वार्ता में मौजूद वन संरक्षक बरेली वीके सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र में बाघों की निगरानी के लिए एक वॉच टॉवर बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण परिषद ने उत्तर प्रदेश के टाईगर प्रोजेक्ट के लिए आठ करोड रूपये स्वीकृत किए हैं, इसमें अकेले पीलीभीत टाईगर रिजर्व के लिए 6.97 करोड रूपये स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि टाईगर प्रोटेक्शन फोर्स और टाईगर फाउंडेशन का प्रस्ताव शासन ने स्वीकृत कर लिया है। इसे अब मुख्यमंत्री के पास भेजा गया है। किसी भी दिन इसकी घोषणा हो सकती है। वार्ता में प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश, प्रभागीय निदेशक आदर्श कुमार, उप प्रभागीय वनाधिकारी कृष्णपाल सिंह भी मौजूद रहे।
पीलीभीत के जंगल की बाउंड्री संभव नहीं
पीलीभीत। प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक बाघ परियोजना एके द्विवेदी ने कहा है कि जिस व्यक्ति के परिवार कोई सदस्य बाघ के हमले में मारा जाता है, वह अवश्य उसका दुश्मन बन जाता है। क्योंकि उसे सीधे तौर पर बाघ से नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि बाघ प्रकृति के संतुलन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि उसे समाप्त कर दिया गया तो अभी बाघ-मानव संघर्ष की घटनाएं तो रूक जाएगी लेकिन इसके सौ गुनी समस्याएं बढ जाएंगी। इसलिए सरकार बाघ का सरंक्षण करा रही है।
पीलीभीत टाईगर रिजर्व में विश्व प्रकृति निधि के तत्वावधान में विश्व बाघ दिवस पर आयोजित बाघ-मानव सहजीविता विषय पर परिचर्चा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह सही है कि पीलीभीत जिले में बाघ-मानवजीव के बीच संघर्ष की कई घटनाएं हुई है। उन्होंने कहा कि 1973 में बाघ को बचाने के लिए बाघ परियोजना बनाई गई। तब तक हमने अपने फायदे के लिए बाघों को नुकसान पहुंचा दिया। उन्होंने कहा कि पीलीभीत में बाघ-मानवजीव संघर्ष की कई घटनाएं यहां हुई है। निस्संदेह यह दुखद है। यहां अलर्ट रहने की जरूरत है। इसे रोकने के लिए पीलीभीत में इको विकास समितियों की संख्या बढाई जानी चाहिए।
उनका कहना था कि जब बाघ भटक कर बाहर आ जाए तो वहां उसे स्पेस दें तो वह वापस जंगल लौट जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे जंगल की बाउंड्री कराया जाना संभव नहीं है। क्योंकि इसके लिए बहुत धनराशि खर्च होगी और इसके लिए सरकार बजट उपलब्ध नहीं करा सकती है। इसके लिए कुछ इलाकों में सोलर फैसिंग का प्रयोग सफल रहा है। इसके लिए पीलीभीत टाईगर रिजर्व को कुछ पैसा भी दिया गया है। इनमें ज्यादा संवेदनशील इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से सोलर फैसिंग का कार्य कराया जाएगा।
प्रमुख वन संरक्षक ने कहा कि केवल वन विभाग ही नहीं इसमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है। विशेषकर जंगल के समीप रहने वाले ग्रामीणों के सहयोग की बहुत आवश्यकता है। क्योंकि यह जंगल जितना हमारे लिए महत्वपूर्ण है, उतना ही उसके आसपास रहने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
वन संरक्षक बरेली वीके सिंह ने कहा कि वन विभाग तो एक टूल की तरह कार्य करता है। इसमें जन सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बाघ को तमाशा न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बाघ को देखने के लिए हजारों लोगों का जमावडा हो जाता है इससे केवल औपचारिकता हो पाती है। उन्होंने कहा कि तमाशा न बनाकर वनविभाग को अपना काम करने दिया जाए तो बाघ वापस जंगल चला जाएगा। उन्होंने कहा कि अच्छे जंगल की पहचान होती है जहां दीमक की बांबी सुरक्षित हो और बाघ हो। यहां यह दोनों ही हैं। उन्होंने इस बात से साफ इंकार किया कि पीलीभीत के जंगल में तृणभोजी वन्यजीवों में कमी आई है। इसके लिए उन्होंने आशीष विष्ट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि यहां तीस हजार तृण भोजी वन्यजीवों की संख्या इस रिपोर्ट में आई है।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए पीलीभीत टाईगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश ने पीलीभीत के जंगल में हाल की घटनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि हमारा प्रयास रहा है कि सभी को मुआवजा प्रदान किया जाए। उन्होंने बताया कि हमने 14 करोड के प्रस्ताव भेजे थे। इसमें 6.97 करोड रुपये स्वीकृत हो गए है। यह रहाशि शीघ्र मिल जाएगी। कार्यक्रम में तरूण लोधी, पूर्व उप प्रभागीय वनाधिकारी राजाराम शर्मा, रेंजर पीलीभीत सत्येंद्र चैधरी, वन कर्मी रूप लाल, गुरवाज सिंह ने भी संबोधित किया। संचालन विश्व प्रकृति निधि के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार तथा आभार प्रदर्शन प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी आदर्श कुमार ने व्यक्त किया।
बनाये गए दस टाईगर मित्र
पीलीभीत। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर आज वन संरक्षक ने पीलीभीत टाईगर रिजर्व में टाईगर मित्र नियुक्त किये जाने की अपनी घोषणा को अमली जामा पस्त्रत्त्हनाया। इसमें प्रमुख समाचार पत्रों से जुड़े कुछ पत्रकारों, समाजसेवियों और वाइल्ड लाइफ में रुचि रखने वालों को शामिल किया गया है।