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लापरवाह स्कूल प्रबंधन के खिलाफ होगी कार्रवाई

Thu, 30 Jul 2015 11:19 PM IST
Bilsnda
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स्कूल वाहन की खिड़की से गिरकर छात्र की हुई मौत की घटना के बाद प्रशासन एक बार फिर हरकत में आया। एसडीएम ने मृतक छात्र के घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाने के साथ ही लापरवाही बरतने वाले स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। उधर बिना पोस्टमार्टम घरवालों ने छात्र का अंतिम संस्कार कर दिया।
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आरएमसीपी एकेडमी स्कूल से पढ़कर वापस लौटते समय गांव सबुआपुर निवासी मेजर सिंह के छह वर्षीय पुत्र अमृतपाल की स्कूल की मैजिक की खिड़की से गिरकर पहिए के नीचे कुचलकर मौत हो गई थी। इस घटना से घर में कोहराम मच गया। घरवालों ने पोस्टमार्टम कराए बगैर ही छात्र का बृहस्पतिवार को अंतिम संस्कार कर दिया। उधर एसडीएम बीपी सिंह ने गांव पहुंचकर मृतक के घरवालों को ढांढस बंधाया। उन्होंने यह भी माना कि हादसा स्कूल प्रबंधन की लापरवाही की वजह से हुआ है। लिहाजा हर हालत में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में मृतक के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत योजना से आर्थिक सहायता दिलाने का भी आश्वासन दिया। इस मौके पर एसओ राजेश यादव भी मौजूद रहे।

वाहन चेकिंग के दिए निर्देश
छात्र अमृतपाल की मौत की घटना से सभी को आघात पहुंचा है। घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए उन सभी स्कूल वाहनों की सघन चेकिंग के निर्देश दिए गए हैं। छात्र अमृतपाल की मौत स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण हुई है। लिहाजा निश्चित रूप से कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।  -बीपी सिंह, एसडीएम
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जिम्मेदारों पर हो कड़ी कार्रवाई
छात्र की मौत स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण हुई है। इससे पूर्व भी इसी तरह की घटना हो चुकी है। लिहाजा घटना में जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
अटल सिंह जायसवाल, चेयरमैन नगर पंचायत
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अप्रैल माह में बजाज पब्लिक स्कूल के छात्र की मौत के बाद प्रशासन कुछ दिन तो हरकत में रहा, लेकिन उसके बाद शिथिल पड़ गया। यदि घटना के बाद से प्रशासन सजग रहता तो शायद घटना की पुनरावृत्ति नहीं होती।
सुधीर अग्रवाल, व्यवसायी

अलग-अलग संस्थाओं के
नाम से चलता मिला स्कूल
छात्र की मौत की घटना के बाद हरकत में आए प्रशासन को स्कूल की मान्यता के संबंध में भी भारी गड़बड़ी मिली। जिस नाम से स्कूल का संचालन और प्रचार प्रसार किया जा रहा है, उसकी मान्यता कक्षा छह से आठ तक की है। इतना ही नहीं प्राइमरी वर्ग की मान्यता आलोक बाल विद्या मंदिर के नाम से  है। जो कुछ वर्ष पहले तक नगर के मोहल्ला पक्का तालाब में चल रहा था।
बीएसए अंबरीष कुमार यादव के निर्देश पर बृहस्पतिवार को एबीआरसी रामदास जायसवाल ने जब स्कूल की मान्यता संबंधी फाइल देखी तो इसका खुलासा हुआ। इतना ही नहीं, जिस भवन में आरएमसीपी स्कूल का संचालन हो रहा है, उसमें किसी भी स्कूल के नाम का बोर्ड ही नहीं लगा है। एबीआरसी ने बीएसए को भेजी गई रिपोर्ट में कहा कि नगर निवासी नरेंद्र मोहन सक्सेना द्वारा आरएमसीपी एकेडमी के नाम से जिस स्कूल का संचालन किया जा रहा है। उसकी मान्यता कक्षा छह से आठ तक की ही है। रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि आलोक बाल विद्या मंदिर का संचालन कुछ वर्ष मोहल्ला पक्का तालाब स्थित ठाकुरद्वारा मंदिर में होता था। जिसकी प्रबंध समिति में शिक्षक राम सतीश बाजपेई के परिजन थे। अब उसी स्कूल की मान्यता से आरएमसीपी एकेडमी में प्राइमरी की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इतना ही नहीं पूर्व की प्रबंध समिति में शामिल सदस्य भी बदले जा चुके हैं। एक भवन में अलग-अलग नामों से चल रही दो संस्थाओं का मामला उजागर होने से शिक्षा विभाग चकित है। एबीआरसी का कहना है कि यही वजह है कि जिस भवन में कक्षाएं संचालित हो रही है उसके भवन में कहीं पर भी दोनों संस्थाओं में से किसी के भी नाम का बोर्ड नहीं लगा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नरेंद्र मोहन सक्सेना ने स्कूल भवन में तो संस्था का नाम नहीं लिखवाया, लेकिन नगर में विभिन्न स्थानों पर जो बाल पेंटिंग कराई है उसमें आरएमसीपी एकेडमी दर्शाया है और बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा हिन्दी माध्यम की मान्यता होने के बावजूद बाल पेटिंग में अंग्रेजी माध्यम से मान्यता दर्शाई गई है। जिससे अभिभावकों को पूरी तरह गुमराह किया जा रहा है।

स्कूल में पसरा सन्नाटा,  
परिसर से गायब रहे वाहन
आरएमसीपी एकेडमी स्कूल में बृहस्पतिवार को पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। कैंपस में खड़े होने वाले वाहन भी गायब रहे। छात्र अमृतपाल की मौत की घटना के बाद प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई की आशंका के  चलते आरएमसीपी स्कूल के अलावा अन्य स्कूलों के वाहन भी स्कूलों से नदारद रहे। जो बच्चे अपने अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंच गए, उन्हें पैदल ही घर लौटना पड़ा। उधर आरएमसीपी एकेडमी स्कूल में पढने वाले बच्चों को लेने कोई भी स्कूल का वाहन आज नहीं  पहुंचा। जिस कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाए।
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