संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। जिले में कम मतदान के कारणों पर मंथन तेज हो गया है। राजनीतिक दलों के जानकार, आमजन और प्रशासन समीक्षा में जुट गए हैं। इसी क्रम में जिले में शत-प्रतिशत मतदान की मुहिम में जुटे जिला स्वीप कोआर्डिनेटर ने कम मतदान की वजह मौसम, गेहूं कटाई और कुछ जन प्रतिनिधियों की वादाखिलाफी को माना है।
पीलीभीत लोकसभा सीट पर इस बार वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से करीब चार प्रतिशत कम मतदान हुआ। बावजूद इसके कि प्रशासन इस बार शत-प्रतिशत मतदान के प्रयास में था। विधानसभा चुनाव में जिन 227 बूथों पर 60 प्रतिशत से कम मतदान हुआ था। वहां मतदाताओं को जागरूक करने के लिए विशेष मुहिम चलाई गई।
मतदाताओं को चिट्ठी और ग्रीटिंग बांटे गए। प्रवासी मतदाताओं को बुलाने का प्रयास भी किया गया। इस सबके बावजूद जिले में सिर्फ 63.11 प्रतिशत वोट ही पड़े। कम मतदान को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। प्रशासन के प्रयासों पर भी सवाल खड़े होने लगे। जिला स्वीप कोऑर्डिनेटर इन्तजार खान ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि मतदान के प्रति जागरूकता के लिए करीब छह माह से प्रयास कर रहे थे। उम्मीद थी कि इस बार जिले में रिकाॅर्ड वोट पडेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसकी मुख्य वजह गेहूं की कटाई और गर्म मौसम रहा।
जिला स्वीप कोआर्डिनेटर का कहना है कि पुरैना के नजदीक ग्राम पंचायतों के मतदाताओं में कुछ जन प्रतिनिधियों की वादाखिलाफी को लेकर गुस्सा था। कुछ स्थानों पर पुरुष मतदाताओं ने मतदान किया लेकिन महिलाओं ने मतदान के प्रति रुचि नहीं दिखाई।
लोगों ने अपना वोट तो डाला लेकिन परिजनों को मतदान के लिए प्रेरित नहीं किया। आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों में भी लोगों का कहना था कि नेता चुनाव जीत जाते हैं, जब हम समस्याएं लेकर जाते हैं तो मिलना भी पसंद नहीं करते। शहरी मतदाता भी मतदान को लेकर ज्यादा सजग नहीं रहे। मौसम ने भी मतदान पर असर डाला।