पूरनपुर। छह दशक के लंबे इंतजार के बाद भूमिधरी का तोहफा मिलने से खुश किसान रामचंद्र महज 28 घंटे बाद ही चल बसे। मंगलवार सुबह हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। किसान की मौत क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही।
ग्राम पंचायत रामनगर के गांव चंद्रनगर निवासी रामचंद्र वर्ष 1961-62 में पूर्वांचल से विस्थापित होकर आए थे। उप निवेशन योजना के तहत उनको करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन दी गई थी। योजना के तहत, वह जमीन का उपभोग तो कर सकते थे। उनके परिजनों के नाम भी आ सकती थी, लेकिन उसकी बिक्री का अधिकार नहीं था। पूर्वांचल से विस्थापित होकर बसे लोगों ने संक्रमणीय भूमिधर का अधिकार पाने को लंबा संघर्ष किया। सोमवार को मुख्यमंत्री ने उनको संक्रमणीय भूमिधरी का अधिकार का प्रमाण पत्र दिया। तब उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
रामचंद्र के पुत्र पूर्व प्रधान जवाहर लाल ने बताया कि सोमवार शाम को पूरे परिवार के साथ बैठे उनके पिता बहुत खुश थे। उन्होंने कहा कि छह दशक के संघर्ष के बाद इसका पहला तोहफा उनको मिला है। पिता ने पुत्रों, पुत्रवधूओं, पौत्रों को अपने पास बैठाकर खुशी का इजहार किया। मंगलवार को उसके पिता जिंदगी की जंग से हार गए।
पूर्व प्रधान ने बताया कि रात को पिता और अन्य लोग घर के बाहर खुले में सोए थे। मंगलवार सुबह चार बजे आंख खुलने पर पिता को घर की चौखट पर बैठे देखा। इस दौरान अचानक वह गिर गए। संपूर्णानगर में एक चिकित्सक के पास ले गए। चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सक के अनुसार, हार्ट अटैक से उनकी मौत हुई है। तहसीलदार आशीष गुप्ता ने टीम के साथ किसान के घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। संवाद
जिंदगी भर रहे निरोगी रहे रामचंद्र
किसान रामचंद्र के परिवार में पत्नी कस्तूरी देवी के अलावा चार पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र लाल बहादुर, उससे छोटे जवाहर लाल, जसवंत, रविंद्र और दो बेटियां है। पुत्र-पुत्रियों की शादी हो चुकी है। उनके पुत्र पूर्व प्रधान जवाहर लाल ने बताया कि उनके पिता जिंदगी भर निरोगी रहे। कभी ऐसे बीमार नहीं हुए कि उनको अस्पताल ले जाया जाता। बोले, पिता ने तो अंतिम समय तक एक भी टैबलेट नहीं ली।
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