परिवार का भरण पोषण करने के लिए चीनी मिल में मजदूरी करने वाले तीन लोग काल के गाल में समा गए। खुशनुमा माहौल एक पल में चीनी मिल में हुए ब्लास्ट की सूचना मिलते ही अपनों की फिक्र से परेशानी में शुरू हुआ और मौत की खबर के सथ मातम में तब्दील हो गया। मलवे में दबे अपनों को बचाने के लिए किया जा रहा शोर, कब चीतकारों में बदल गया कोई समझ नहीं सका। घरों के बाहर ग्रामीणों की भीड़ पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाती रही।
सात माह पहले ही शादी के बंधन में बंधा था विष्णु
हादसे में जान गंवाने वाला बरहा गांव निवासी विष्णु (20) के पिता प्रेमलाल रेलवे कर्मचारी हैं। उनके पांच बच्चे है। सबसे बड़ी बेटी कृष्णा की शादी हो चुकी है। इसके अलावा चार बेटों में विष्णु सबसे बड़ा है। तीन छोटे भाई ओमकार, किसन व सूरज है।सात महीने पहले ही अप्रैल माह में उसकी शादी बरेली के शाही थाना क्षेत्र के बलेई गांव निवासी गुलशन से हुई थी। एलएच चीनी मिल में सीजनल मजदूर के तौर पर वह लगातार पांच सालों से काम कर रहा था। मिल में ही काम करने वाले गांव के सूरज व हीरालाल घर आकर हादसे की सूचना दी तो परिवार में कोहराम मच गया। मां चंद्रकली व पत्नी गुलशन का रो रोकर बुरा हाल है।
पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ा था पवन
हादसे की भेंट चढ़ने वाला दूसरा मजदूर पवन पुत्र डालचंद भी बरहा गांव का ही रहने वाला था। विष्णु के मकान से चंद कदम दूरी पर ही उसका मकान है। दोनों साथ में ही चीनी मिल आया-जाया करते थे। उसके चार छोटे-भाई बहन गंगा, वर्षा, गोपाल व पंकज है। मिल में हुए ब्लास्ट के बाद गांव के युवकों से उनको सूचना मिली थी। जिस पर परिवारीजन वहां पहुंचे थे। रविवार को दोनों के शवों का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
20 साल से चीनी मिल में काम कर रहे थे भारत
रविवार सुबह मलवे से घंटों की कोशिशों के बाद निकाली गई तीसरी लाश गजरौला क्षेत्र के सराय सुंदरपुर निवासी भारत कश्यप की थी। वह करीब 20 साल से मिल में काम करते आ रहे थे। उनके पांच बच्चे दयादेव, नरदेव विवाहित व प्रेम, मोनी, व आनंद अविवाहित है। पत्नी राजकुमारी की बीमारी के चलते बारह साल पहले मौत हो चुकी थी। अब चीनी मिल में हुए हादसे में परिवार वालों ने घर का मुखिया भी खो दिया है।