शहर में सुबह शाम सड़कों पर टहलने वाला भैंसों के झुंड शहरवासियों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं। रोजमर्रा के कामों से घर से निकलने वाले लोग अकसर इन आवारा पशुओं के झुंड की चपेट में आकर चोटिल हो रहे हैं। जिम्मेदार पालिका प्रशासन समस्या को लेकर मौन बैठा है, वहीं खामियाजा शहरवासियों को उठाना पड़ रहा है।
शहर में करीब तीन दर्जन से अधिक डेयरियां हैं। घनी आबादी के बीच बनी डेयरियां चंद लोगों का भले ही कारोबार हो, लेकिन लाखों शहरवासियों के लिए किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं हैं। इन डेयरियों पर पालिका प्रशासन का कोई अंकुश न होने से शहर के कई प्रमुख मार्गों पर भैंसों के अलावा अन्य आवारा पशुओं का झुंड राज करता है। इन डेयरियों के समीप रहने वाले लोगों को सीधा नुकसान गंदगी के रूप मेें उठाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर इससे ड्रेनेज सिस्टम भी प्रभावित हो रहा है। सड़कों पर दौड़ते यह जानवर ट्रैफिक व्यवस्था में भी बाधक बने हुए हैं। जानवरों के यह झुंड कभी खड़े वाहनों से टकराकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं, तो कभी यह बड़ी दुर्घटनाओं का सबब बनते हैं। शहर के जिला अस्पताल रोड, जयसंतरी मार्ग, जेपी रोड, आयुर्वेदिक कॉलेज रोड, उपाधि कॉलेज, कचहरी रोड पर इन पशुओं का झुंड सुबह शाम देखा जा सकता है। अरसा पूर्व इन आवारा पशुओं को पकड़कर काजी हाउस में रखा जाता है, लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था बंद कर दी गई। अब पशुओं को झुंड हर किसी के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है।
सहयोग न मिलने से नहीं लगा अंकुश
सड़कों पर घूमने वाले पशुओं की रोकथाम के लिए पूर्व में प्रयास किए गए थे, लेकिन कोई सहयोग न मिलने के कारण अंकुश नहीं लगाया जा सका है। डेयरी संचालकों को नोटिस दिया जाएगा।
प्रभात जायसवाल, अध्यक्ष नगरपालिका