चुनाव आयोग के निर्देश के बाद भी प्रत्याशी आय व्यय का ब्योरा प्रस्तुत करने नहीं पहुंच रहे हैं। शनिवार को जारी नोटिस के बाद भी उपस्थित न होने पर शहर सीट के दो प्रत्याशियों पर एफआईआर की तैयारी की जा रही है। रविवार को पूरनपुर व बीसलपुर के एक-एक प्रत्याशी के उपस्थित न होने पर नोटिस जारी किया गया है। विधानसभा चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों को नामांकन के दिन से अपने चुनाव खर्च का ब्योरा रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सभी को एक एक पुस्तिका भी उपलब्ध कराई गई हैै। इसकी जांच के लिए चुनाव प्रेक्षक ने शनिवार और रविवार का दिन निर्धारित किया था। रविवार को पूरनपुर और बीसलपुर क्षेत्र के प्रत्याशी को उपस्थित होना था। इसमें पूरनपुर से रालोद प्रत्याशी आयशा बेगम और बीसलपुर से राकिमसं के रामरतन उपस्थित नहीं हुए। इस पर चुनाव प्रेक्षक के निर्देश पर दोनों को नोटिस जारी किए गए हैं। मुख्य कोषाधिकारी/ व्यय प्रभारी महामिलिंद लाल ने बताया एक दिन पूर्व हुई जांच में शहर के दो और बरखेड़ा से बसपा प्रत्याशी को उपस्थित न होने पर नोटिस जारी कर 24 घंटे का समय दिया गया था। रविवार को बसपा के डॉ. शैलेंद्र गंगवार की ओर से ब्योरा प्रस्तुत कर दिया गया जबकि शहर सीट से निर्दलीय राजरानी और विजय गंगवार उपस्थित नहीं हुए। समय सीमा निकलने पर दोनों के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई की जा सकती है।
अब आठ और 12 फरवरी को होगी जांच
सहायक व्यय प्रभारी प्रदीप चौहान ने बताया कि प्रत्याशियों को आय व्यय का ब्योरा प्रस्तुत करने की तिथियों में बदलाव किया गया है। अब आठ और 12 फरवरी को सभी प्रत्याशियों को अपना ब्योरा प्रस्तुत करना होगा।
ब्योरा प्रस्तुत करने में छूट रहे पसीने
विधायक बनकर माननीय बनने का सपना देख रहे प्रत्याशी यूं तो बड़े बड़े वादे और दावे कर रहे हैं लेकिन चुनाव आयोग के निर्देश पर चुनाव खर्च तैयार करने में पसीने छूट रहे हैं। किसी ने वकील को लगा रखा है तो किसी ने सीए की सेवाएं ली हैं। इसके बाद भी व्यय टीम द्वारा आंके गए खर्च और प्रत्याशियों द्वारा तैयार ब्योरे में अंतर आ रहा है, हालांकि पहला दिन होने के चलते इसको लेकर किसी पर कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन सभी को हिदायत दी जा रही है।
खर्च कम दर्शाने को कैसे-कैसे उपाय
यूं तो नेताजी नुक्कड़ सभाएं कर जनसमर्थन मांग रहे हैं। इसमें मंच, कुर्सी, माइक लेेकर फूलमालाओं तक की व्यवस्था खुद कर रहे हैं, लेकिन खर्च कम दर्शाने को कोई स्कूल की कुर्सियां दिखा रहा है तो कोई समर्थकों द्वारा फूलमालाएं पहनाने की बात कह रहा है।
कोई नहीं कर रहा कैशलैस भुगतान
चुनाव से पूर्व हुई नोटबंदी में कैशलैस भुगतान को बढ़ावा देने की कवायद शुरू की गई थी, लेकिन माननीय बनने की होड़ में जुटे प्रत्याशी इससे बच रहे हैं। शनिवार और रविवार को हुई खर्च की जांच में किसी भी प्रत्याशी ने एक भी भुगतान कैश लेश माध्यम से नहीं दर्शाया है।