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गर्मी बढ़ते ही शेल्टर होम अब लगने लगे सजा के अड्डे

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पीलीभीत। लॉकडाउन के चलते बाहर से पलायन करके आए लोगों को ठहराने के लिए बने शेल्टर होम भगवान भरोसे चल रहे हैं। यहां बैठने या सोने के लिए बिस्तर तो हैं, मगर खाने पीने की व्यवस्था सामाजिक संस्थाओं के भरोसे ही है। गर्मी में हालात और खराब हो रहे हैं। लोगों का समय काटे नहीं कट रहा। लाइट जाने के बाद जेनरेटर का इंतजाम न होने से अंधेरे में रहना पड़ता है। इसमें रह रहे लोगों को ये शेल्टर होम किसी सजा से कम नहीं लग रहे हैं।
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शहर और चार तहसीलों में नौ शेल्टर होम बनाए गए हैं। एक शेल्टर होम में 20 से 25 लोग तक ठहराए जा सकते हैं। वीरांगना आवंतीबाई शेल्टर होम में बिहार और उत्तराखंड के रहने वाले चार लोग 14 दिन के लिए क्वारंटीन है। निर्धारित समय पूरा हो चुका है। मगर, दोनों राज्यों की सरकारों ने इन्हें अपने यहां बुलाने का इंतजाम नहीं किया, इसलिए इन लोगों को शेल्टर होम में ही रहना पड़ रहा है। उन्हें हालांकि अलग-अलग बेड दिए गए हैं। इसमें रहने वालों का कहना है कि शुरुआती एक-दो दिन तो खाने पीने की व्यवस्था हुई। स्क्रीनिंग भी की गई। मगर अब ऐसा नहीं हो रहा।
शहर के चिरौंजीलाल वेदपाल इंटर कॉलेज और वीरांगना अवंतीबाई इंटर कॉलेज शेल्टर होम में बृहस्पतिवार को अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। शेल्टर होम में रुकने वालों को टाइम से खाना मिलना भी मुश्किल है। कभी-कभार समाजसेवी ही खाना पहुंचा जाते हैं। गर्मी में लाइट जाने के बाद जेनरेटर की व्यवस्था नहीं है। न ही बेड सीट रोज बदली जाती है। शेल्टर होम में रुकने वाले सामाजिक दूरी का भी पालन नहीं कर रहे। एक शेल्टर होम में चार लोगों के साथ दो मानसिक रोगियों को ठहरा दिया गया है। बिहार के युवक के अनुसार इन लोगों की वजह से वह ठीक से सो नहीं पाते है। रहने वाले लोगों को शेल्टर होम किसी सजा से कम नहीं लग रहा है।
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कहीं जनरेटर है भी तो चलाते नहीं
बीसलपुर में बाला देवी रोशन लाल डिग्री कॉलेज में 51, मदर्स पब्लिक स्कूल में 54, और अग्रवाल सभा भवन के शेल्टर होम में 16 लोग ठहरे हैं। तीन शेल्टर होम में ठहरने वाले लोगों के सोने के लिए जमीन पर बिस्तर लगाया गया है। बाला देवी और मदर्स स्कूल में जनरेटर तो है, लेकिन लाइट जाने के बाद उसे चलाया नहीं जाता है। अग्रवाल सभा में जनरेटर नहीं है। इसलिए लाइट जाने के बाद लोगों को अंधेरे में रहना पड़ता है। लाइट जाने के बाद वहां गर्मी से लोगों की हालत खराब हो जाती है। लाइट जाने के बाद कोई कर्मचारी देखने भी नहीं आता है। ऐसे वहां रहना शेल्टर होम की व्यवस्थाओं को दुरूस्त रखने के लिए एक मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन किसी भी शेल्टर होम पर मजिस्ट्रेट मौजूद नहीं रहता है।
ताश खेलकर टाइम पास कर रहे लोग
पूरनपुर। गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लक्ष्य डिग्री कॉलेज, लकी चिल्ड्रेन स्कूल में शेल्टर होम बना है। गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बिहार के 22 लोग रह रहे हैं। बिहार सरकार से स्वीकृत न मिलने से इन्हें नहीं भेजा जा सका। क्वारंटीन की समय सीमा पूरी होने के इस शेल्टर होम के दो कमरों में ठहरे हुए लोग ताश खेलकर समय बिता रहे हैं। हाल में गोरखपुर के 14, कानपुर से एक, संत कबीरनगर और महाराजगंज के दो-दो के लोगों को रखा गया है। सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी मोबाइल फोन देखने में व्यस्त रहता है। क्वारंटीन लोग सोते रहते हैं। शेल्टर होम से पांच लोग भागने की भी कोशिश कर चुके हैं।
बोले, शेल्टर होम में ठहरे हुए लोग
लॉकडाउन के बाद परिवार बिहार में भुखमरी से जूझ रहा है। शेल्टर होम में हम परेशान हैं क्योंकि दो मानसिक लोगों को ठहरा दिया गया है। वे रात भर सोने नहीं देते। - संतोष, निवासी बिहार
लॉकडाउन में घर जाने के लिए निकले थे। हमें 14 दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया गया। अब तो 24 दिन हो गए है। शेल्टर होम में व्यवस्थाएं भी ठीक नहीं है। लगता है कि सजा काट रहे हैं। - अशोक, निवासी उत्तराखंड
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