पीलीभीत। अलग पहचान रखने वाले बंगाल फ्लोरिकन पक्षी पीलीभीत टाइगर रिजर्व से गायब होते जा रहे हैं। इन पक्षियों की घटती संख्या से वनाधिकारी भी चिंतित हैं। दुर्लभ श्रेणी में शुमार इस पक्षी के कम होने के कारण के लिए सर्व कराया जा रहा है। सर्वे वन विभाग एक संस्था के जरिये के सहयोग से कर रहा है। सर्वे टीम पक्षियों के फोटोग्राफ के साथ उनकी वॉयस सैंपल भी लेगी। वन अफसरों के मुताबिक सर्वे 10 मई तक पूरा कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद इसके संरक्षण की दिशा में काम किया जाएगा।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के अलावा पक्षियों का भी अपना रुपहला संसार है। यहां 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। यह दीगर बात यह है कि पीटीआर में पक्षी संरक्षण को लेकर अभी तक कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। यही वजह है कि पक्षियों की कुछ प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। इन्हीं में एक बंगाल फ्लोरिकन भी है। इसे बंगाल बस्टर्ड भी कहा जाता है। वर्ष 2015-16 के आसपास बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी की ओर से किए गए सर्वे में पीटीआर में इनकी संख्या छह पाई गई थी। लुप्त हो रहे बंगाल फ्लोरिकन को शेड्यूल वन की श्रेणी में रखा गया है। यह दुर्लभ प्रजाति के 17 पक्षियों में से एक है। विशेषज्ञों के मुताबिक अधिकांशत: ग्रासलैंड में रहने वाले बंगाल फ्लोरिकन ज्यादा नमी वाले मौसम या बारिश के दौरान यह पानी वाले क्षेत्रों से दूर चले जाते हैं। पिछले कुछ सालों से बंगाल फ्लोरिकन देखे भी नहीं जा रहे हैं। बताते हैं कि संरक्षण के प्रयास न होने से इनकी संख्या घटती जा रही है। पीटीआर प्रशासन ने इनकी संख्या जानने को लेकर 15 मार्च से एक सर्वे शुरू कराया है। सर्वे 10 मई तक किया जाना है। इसके बाद इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
पीटीआर को तीन जोन में बांट कर सर्वे
बंगाल फ्लोरिकन के सर्वे को लेकर पीटीआर को तीन जोन में बांटकर सर्वे शुरू किया जा रहा है। प्रथम जोन में महोफ रेंज, द्वितीय जोन में बराही तथा हरीपुर रेंज और तृतीय जोन में माला और दियूरिया रेंज को शामिल किया गया है। सर्वे में टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी की मदद ली जा रही है। सोसायटी के मोहम्मद अख्तर मियां के मुताबिक यह सर्वे कॉल और डायरेक्ट साइटिंग के माध्यम से किया जा रहा है। सर्वे के दौरान बंगाल फ्लोरिकन के फोटाग्राफ्स, वीडियो और उनका वॉयस सैंपल भी लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन पक्षियों के उड़ान भरकर छिप जाने और फिर तेजी से नीचे आकर एक जगह से दूसरी जगह दौड़ जाने से इनकी गणना करना बहुत ही मुश्किल काम है।
धीमी प्रजनन गति भी एक वजह
मोहम्मद अख्तर मियां ने बताया कि विशेषज्ञों के मुताबिक बंगाल फ्लोरिकन के प्रजनन की गति काफी धीमी होती है। यही वजह है कि इनकी संख्या में उतनी वृद्धि नहीं हो रही है जितनी कि अन्य पक्षियों की हो रही है।
पीटीआर में बंगाल फ्लोरिकन की वास्तविक स्थिति जानने को सर्वे शुरू कराया गया है। 10 मई तक सर्वे कार्य पूरा होना है। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व