पीलीभीत/माधोटांडा। अब बीमार और घायल बाघों को पीटीआर में ही इलाज मिल सकेगा। इसके लिए टाइगर रिजर्व में इटावा की लायन सफारी की तर्ज पर रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। प्रमुख वन संरक्षक सुनील कुमार पांडे की घोषणा के बाद रेस्क्यू सेंटर टाइगर रिजर्व के माला जंगल में खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। टाइगर रिजर्व के अधिकारी माला रेंज में रेस्क्यू सेंटर खोले जाने की बात कह रहे हैं। जगह की तलाश में लगे अफसरों ने सेंटर की डिजाइन तैयार करा ली है।
पड़ोसी देश नेपाल और उत्तराखंड के अलावा दुधवा टाइगर रिजर्व की सीमा से सटा 73 हजार हेक्टेयर में घोड़े की नाल की आकृति में फैले पीलीभीत टाइगर रिजर्व का क्षेत्र सूबे के अन्य टाइगर रिजर्व की तुलना में कई मायनों से बेहतर माना जाता है। यहां सीमित संसाधन होने के बावजूद बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या में खासी बढ़ोतरी हो रही है। बाघों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद यहां आने वाले पर्यटकों को जंगल में भ्रमण के दौरान बाघ कभी कभार ही देखने को मिल पाते हैं। ऐसे में पर्यटकों के हाथ मायूसी ही आती है। इस सब को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन वन संरक्षक बरेली वृत वीके सिंह ने जंगल से बाहर निकलकर हमलावर हो रहे और अन्य कारणों से पकड़कर दूसरे नेशनल पार्क व चिड़ियाघर में भेजने वाले बाघों को जनपद के टाइगर रिजर्व में ही खुले क्षेत्र में सुरक्षित रखने को प्रस्ताव शासन को भेजा था।
शासन ने इस मामले में अपनी सैद्धांतिक रूप से सहमति तो दे दी थी, लेकिन पांच सदस्यीय एक कमेटी का गठन कर दिया था। जिसकी पहली बैठक 13 अक्टूबर 2017 को हुई थी। बताते हैं कि कुछ तकनीकी कारणों के चलते सीधे टाइगर सफारी का प्रावधान नहीं है और उसमें प्रदेश से लेकर केंद्र तक कई विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है। इस कारण वन विभाग के आला अफसरों और शासन ने मंथन के बाद मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं और जंगल से बाहर निकलने वाले बाघों को रोकने के लिए टाइगर रेस्क्यू सेंटर खोले जाने की बात कही थी। उसी वर्ष जनपद भ्रमण पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी सहमति दे दी थी और इसका प्रस्ताव भेजने की बात कही थी।
प्रस्ताव भेजे जाने के बाद टाइगर रिजर्व के आला अधिकारी रेस्क्यू सेंटर बराही के बरुआ कुठारा क्षेत्र में बनाने की बात कह रहे थे, लेकिन बरुआ कुठारा में लंबे समय से अवैध कब्जा हैं। जिसे आज तक वन महकमा प्रशासन की मदद से भी खाली नहीं करा सका। हालांकि रेस्क्यू सेंटर मात्र 10 हेक्टेयर में बनाए जाने की योजना थी। इसी कारण बरुआ कुठारा के बजाय माला रेंज में रेस्क्यू सेंटर बनाने की योजना बनाई गई। उसके बाद मामला टल गया।
इधर अब प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक सुनील कुमार पांडे ने एक बार फिर टाइगर रिजर्व में टाइगर रेस्क्यू सेंटर खोले जाने की घोषणा की है। जिसके लिए शासन ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। इससे ऐसा माना जा रहा है कि शीघ्र टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू सेंटर खोल दिया जाएगा। जो बाघ घायल अवस्था में या पकड़े जाने के बाद दूसरे नेशनल पार्कों या चिड़ियाघरों में भेजे जाते थे, उन्हें तत्काल टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू सेंटर में रखकर इलाज किया जाएगा। इसके साथ ही आने वाले पर्यटकों को भी खुले में रेस्क्यू सेंटर में बाघ देखने को मिल सकेंगे। टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक रेस्क्यू सेंटर इटावा की लायन सफारी की तर्ज पर बनाया जाएगा। इसके लिए उपयुक्त भूमि की तलाश जारी है। उपयुक्त भूमि का चयन होते ही इसका प्रस्ताव बनाकर भेज दिया जाएगा।
- मार्च 2014 में पूरनपुर क्षेत्र से पकड़ा गया बाघ कानपुर ले जाया गया
- नवंबर 2016 को गांव मल्लपुर से पकड़े गए बाघ का महोफ रेंज के जंगल में छोड़ा गया
- फरवरी 2017 को गांव सुखदासपुर में पकड़े गए बाघ को लखनऊ प्राणि उद्यान ले जाया गया
- जून 2017 को जटपुरा से पकड़े गए तेंदुए को लखनऊ भेजा गया
- फरवरी 2018 में विधिपुर से पकड़े गए बाघ को करतनिया घाट के जंगल में छोड़ा गया
- मार्च 2018 में चांदपुर से पकड़े गए बाघ को बेलरायां रेंज (खीरी) ले जाया गया
- सितंबर 2018 गांव बूंदीभूड़ से पकड़े गए तेंदुए को महोफ रेंज के जंगल में छोड़ा गया
- दिसंबर 2018 को गांव महाराजपुर से पकड़े गए तेंदुए को महोफ रेंज ले जाया गया
- फरवरी 2019 में गांव नौजल्हा से पकड़े गए तेंदुए को दियूरिया रेंज में छोड़ा गया
- मई 2019 में गांव खजुरिया पचपेड़ा से पकड़े गए बाघ को लखनऊ चिड़ियाघर ले जाया गया
- सितंबर 2019 को सेल्हा से पकड़े गए तेंदुए को कानपुर चिड़ियाघर में छोड़ा गया
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टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू सेंटर बनाने को डिजाइन तैयार किया जा चुका है। इटावा के लायन सफारी की तर्ज पर रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। उपयुक्त जगह की तलाश की जा रही है। मिलते ही प्रस्ताव बनाकर भेज दिया जाएगा। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व