पीलीभीत। पीटीआर में कर्नाटक से पांच हाथियों को लाने की कवायद पुन: शुरू होने वाली है। इसको लेकर पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर के नेतृत्व में एक टीम इसी माह के अंत तक कर्नाटक के लिए रवाना होगी। हालांकि इन हाथियों को पिछले साल ही लाया जाना था। मगर कोरोना संक्रमण के चलते यह कवायद ठंडी पड़ गई थी। हाथियों के आने से जहां रेस्क्यू ऑपरेशन में बाघों पर काबू पाया जा सकेगा, वहीं बीहड़ जंगल में कॉबिंग में भी मदद मिलेगी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित हुए सात साल हो चुके हैं, मगर अभी भी संसाधनों की खासी कमी देखी जा रही है। हाल में 54 लाख रुपये की लागत रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान काम आने वाले जरूरी संसाधन मिल चुके हैं। मगर अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन और बीहड़ जंगल में कॉबिंग के दौरान संसाधनों की कमी अखर रही है। पीटीआर में बाघों की बढ़ती संख्या के चलते बाघों के जंगल क्षेत्र से बाहर निकलने की घटनाएं प्रकाश में आती रहती है। इन बाघों को काबू में करने के लिए पीटीआर को दुधवा टाइगर रिजर्व से प्रशिक्षित हाथियों को बुलाना पड़ता है। करीब दो साल पूर्व पीटीआर के अफसरों ने कर्नाटक से हाथी मंगवाने का निर्णय लिया था। इसको लेकर कर्नाटक सरकार को पांच हाथी देने का प्रस्ताव भेजा गया था। लंबी प्रक्रिया से गुजरने के बाद कर्नाटक सरकार ने पीटीआर को हाथी देने को हामी भी भर दी थी। कर्नाटक सरकार से मिली अनुमति को उच्चाधिकारियों के माध्यम से प्रदेश सरकार के पास भेजा गया। प्रदेश सरकार से मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार को भेेज दिया गया। गत वर्ष इसकी मंजूरी भी मिल चुकी है। इसको लेकर करीब 50 बजट का बजट भी सुरक्षित किया जा चुका है। वन अफसरों ने पिछले साल हाथियों को मंगाने की तैयारी शुरू ही की थी, मगर कोरोना के चलते मामला थम गया। चालू साल की शुरूआत में फिर से हाथियों को लाने के लिए उच्चाधिकारियों से संपर्क साधा गया, मगर कोरोना की दूसरी लहर के चलते मामला फिर से थम गया। इधर अब स्थिति सामान्य होती देख पीटीआर के अफसरों ने कर्नाटक से हाथियों को लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसको लेकर पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल के नेतृत्व में एक टीम माह के अंत तक कर्नाटक जाएगी। टीम वहां जाकर हाथियों और उनके प्रशिक्षकों को लाने के लिए कर्नाटक के अधिकारियों से विचार-विमर्श करेगी। इसके बाद हाथियों को पीटीआर लाया जाएगा।
कर्र्नाटक से पिछले साल ही हाथियों को लाने के प्रयास किए जा रहे थे, मगर कोरोना महामारी के चलते इसे रोक दिया गया था। यदि स्थिति सामान्य बनी रही तो इस माह के अंत तक कर्नाटक जाकर वहां के अफसरों से वार्ता कर हाथियों और उनके प्रशिक्षकों को लाने का प्लान बनाया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द ही पीटीआर में हाथी आ जाएंगे। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व