पीलीभीत। भारत-नेपाल की खुली सीमा के कारण धर्मांतरण के मामले दिनों-दिन बढ़ रहे हैं। सीमा से सटे गांवों में चल रहे इस खेल में विदेशी एजेंसियां सक्रिय हैं। पादरी नेपाल के रास्ते सीमा से सटे गांवों में आकर धर्मांतरण की जड़ें मजबूत कर रहे हैं। हरियाणा और पंजाब से आकर इनके सहयोगी भी सिख समाज के लोगों को बरगला रहे हैं। भले ही पुलिस-प्रशासन हाल-फिलहाल में इस तरह की घटना न होने की बात कह रहा है। मगर लंबे समय से चल रहे इस खेल ने कई सिख परिवारों को अपना निशाना बनाया है।
जिले की सीमा नेपाल से सटी है। अवैध गतिविधियों की वजह से सीमावर्ती क्षेत्र अक्सर चर्चा में रहता है। ताजा मामला धर्मांतरण का है। नेपाल बॉर्डर से सटे गांवों में धर्मांतरण का खेल जोरों पर है। इस खेल में नेपाल से आने वाले पादरियों की भूमिका अहम बताई जा रही है। ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर कौंसिल के प्रदेश अध्यक्ष व लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष हरपाल सिंह जग्गी ने शुक्रवार को पूरनपुर में प्रेसवार्ता कर नेपाल सीमा से सटे बैल्हा, सिंघाडा उर्फ टाटरगंज, वमनपुरी आदि गांवों में रहने वाले सिख समाज के लोगों का जबरन धर्मांतरण कराए जाने की बात कही। डीएम-एसपी से मुलाकात कर मामले की शिकायत की और परिवाराें की सूची भी सौंपी। बताया कि धर्मांतरण के खेल में विदेशी एजेंसियां सक्रिय हैं। खुली सीमा का फायदा उठाकर पादरी नेपाल से सीमा से सटे सिख बहुल गांवों में आते हैं। जबरन धर्मांतरण कराया जाता है। विरोध करने वालों से मारपीट की जाती है। हाल ही में हजारा थाने में दर्ज किया गया मुकदमा भी इस बात की गवाही दे रहा है।