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इलाज के अभाव में गर्भवती महिला की मौत के मामले में जांच शुरू

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पीलीभीत। पांच माह की महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में प्राइवेट अस्पतालों की लापरवाही की बात सामने आने के बाद डीएम ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने इस मामले की गहनता के साथ जांच शुरू कराई है। साथ ही महिला के पति से भी इलाज न होने के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल महिला के पति ने इस मामले में अब तक कोई भी लिखित शिकायत नहीं की है।
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कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला फीलखाना निवासी सिराज अहमद की 28 वर्षीय पत्नी अर्सी पांच माह की गर्भवती थीं। शनिवार शाम छह बजे अचानक तेज दर्द के साथ तबीयत खराब पर सिराज उसे रिक्शे पर लेकर शहर के पांच प्राइवेट अस्पतालों में गया। मगर, कोरोना संदिग्ध के कारण सील चल रहे फीलखाना का नाम सुनने के बाद किसी भी डॉक्टर ने दर्द से तड़पती गर्भवती महिला का इलाज नहीं किया। यहां तक कि डॉक्टरों ने कोरोना की जांच कराने की बात कहकर उसे देखा तक नहीं। कुछ अस्पतालों में स्टाफ ने सीधे यह कह दिया कि डॉक्टर साहब नहीं हैं और कहकर लौटा दिया।
शौहर दर्द से चिल्लाती पत्नी को बचाने के लिए डॉक्टरों के सामने बहुत गिड़गिड़ाया, मगर डॉक्टर नहीं पसीजे। अंत में वह जब तक उसे जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचा, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। महिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बाहर ही चेकअप करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अमर उजाला में यह खबर प्रमुखता के साथ प्रकाशित होने के बाद डीएम वैभव श्रीवास्तव ने मामले की जांच के निर्देश दिए। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने गर्भवती महिला को इलाज देने में प्राइवेट अस्पतालों की लापरवाही की जांच शुरू कराई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मृतका के घर पहुंचकर उसके पति से भी बातचीत की और इलाज न होने के मामले की जानकारी जुटाने की कोशिश की। मृतका के पति ने इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
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गर्भवती महिला की मौत के मामले में जांच कराई जा रही है। उसके पति से अस्पतालों के बारे में भी पता कराया जा रहा है। जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पति की तरफ से कोई लिखित शिकायत नहीं की है। -डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ।
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