पंचायत चुनाव में प्रधान पद के लिए गांवों में घमासान चल रहा है। विरोधी प्रत्याशी को कैसे हराकर जीत हासिल की जाए को लेकर प्रत्याशी कोई भी कोर-कसर छोड़ना नहीं चाहते। इसके लिए तमाम हथकंड़े भी अपनाएं जा रहे हैं। शेरपुरकलां में मां-बेटी चुनाव मैदान में आमने-सामने हैं। वह भी एक दूसरे को पराजित करने के लिए नहीं बल्कि अंध विश्वास के चलते। एक ही सीट के लिए मां-बेटी के चुनाव मैदान में होने का मामला लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
चौथे चरण के चुनाव चिन्ह आवंटित होने के बाद ब्लाक क्षेत्र में चुनाव प्रचार ने तेजी पकड़ ली है। देररात तक गांव में घूमकर वोट मांगने का सिलसिला शुरू हो गया है। गांव में जगह-जगह होने वाली पंचायतों में इन दिनों चुनाव का मुद्दा ही छाया हुआ है। प्रत्याशी और उनके समर्थक चुनाव किस तरह जीता जाए, इसको लेकर विभिन्न हथकंडे अपना रहे हैं। प्रत्याशियों को उनके करीबियों के अलावा दूर-दराज के रिश्तेदार भी रिश्तेदारी में आकर चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं, लेकिन शेरपुरकलां में पूर्व जिला पंचायत सदस्य असलम कुरैशी की पत्नी एवं पूर्व प्रधान अख्तरजहां और उनकी पुत्री आयशा असलम भी प्रधान पद के लिए एक ही ग्राम पंचायत से चुनाव मैदान में हैं। जो लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि मां-बेटी एक-दूसरे को हराने की जुगत में नहीं हैं।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य असलम कुरैशी ने बताया कि उनकी पत्नी और पुत्री का नाम ‘अ’ और ‘आ’ से शुरू होता है। ऐसे में वर्णमाला के अनुसार पत्नी को ‘अनाज ओसाता हुआ किसान’ चुनाव मिलना तय था। ‘अनाज ओसाता हुआ किसान’ चुनाव चिन्ह को महिलाएं और अशिक्षित लोग जल्दी नहीं समझ पाते। दूसरे नंबर पर चुनाव चिन्ह इमली था। जिसे आम वोटरों को समझाना आसान था। इसके अलावा पिछले चुनाव में प्रधान निर्वाचित हुए खुशनूद अली का चुनाव चिन्ह भी इमली था। इससे पहले उनकी पत्नी प्रधान चुनी गई थीं, तब भी उनका चुनाव चिन्ह इमली ही था। उन्होंने बताया कि इमली चुनाव चिन्ह उनके लिए लकी है, इस लिए अब पत्नी की जगह पुत्री का चुनाव प्रचार तेज कर दिया गया है।