सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक पद्मश्री पंडित राजेंद्र प्रसन्ना ने अपनी बांसुरी के स्वरों से लोगों को सम्मोहित किया। विभिन्न रागों पर आधारित धुन सुनाकर उन्होंने श्रोताओं का दिल जीतने के साथ ही शास्त्रीय संगीत की बारीकियों और खूबियों का भी लोगों को अहसास कराया। उन्होंने वैष्णव जन तो तेने कहिए भजन की धुन बजाकर गांधीजी को श्रद्धांजलि दी।
बांसुरी नगरी के रूप में प्रसिद्ध शहर में स्पिक मैके संस्था की ओर से बेहनर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित राजेंद्र प्रसन्ना ने मां सरस्वती के समक्ष दीप जलाकर किया। इसके बाद उन्होंने अपने सहयोगी तबला वादक पंडित पुडलिंक कृष्ण भागवत और तानपूरे पर शाहजाद रसीद के साथ अपनी प्रस्तुति दी। सबसे पहले राग वृंदावनी सारंग पर आधारित रचना प्रस्तुत की। तबले और बांसुरी की सुमधुर लय पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं। इसके बाद राग मिश्र पीलू में दादरा प्रस्तुत किया। उन्होंने श्रोता के रूप में बैठे बच्चों को अपने साथ मिलाकर गीत सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा स्वयं बांसुरी पर बजाने के साथ बच्चों से गवाकर उनका हौसला बढ़ाया। बच्चों में संगीत के प्रति रुझान पैदा करने के लिए उन्होंने भजन श्याम तेरी बंसी की धुन बजाकर उनसे भजन का मुखड़ा पूछा। अंत में वैष्णव जन तो तेने कहिए की धुन बजाकर उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धाजंलि दी। कार्यक्रम का समापन उन्होंने राग पीलू पर आधारित होरी गीत की धुन से किया। कार्यक्रम में बेनहर के अलावा चिरौंजीलाल वीरेंद्रपाल सरस्वती विद्या मंदिर, लायंस इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राएं, बेनहर कॉलेज के एमडी परविंदर सिंह सैहमी, प्रधानाचार्य रंजीत सैहमी, गुरदित्त सैहमी, करिश्मा सैहमी, उपासना पाराशरी, नितिन कौशिक सहित कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम संयोजक एवं स्पिक मैके के जिला समन्वयक संजीव पाराशरी ने सभी का आभार जताया।