पीलीभीत। शहर की सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शा जाम का सबब बनने के साथ ही बिजली चोरी भी बढ़ा रहे हैं। इनकी चार्जिंग को कोई पुख्ता इंतजाम न होने के कारण छिपते-छिपाते कटिया डालकर ई-रिक्शा की बैटरी चार्जिंग की जा रही है। ऐसे में अफसर रोकथाम के दावे करते रहे, उधर बिजली चोरी और बढ़ गई।
शासन स्तर से जिले को 24 घंटे बिजली दी जा रही। पावर कॉरपोरेशन के अधिकारी भी सप्लाई उसी अनुसार देने का दावा करते हैं। हालांकि आए दिन फाल्ट और खराबी के नाम पर बिजली का गुल होना भी आम बात है। बेहतर सप्लाई देने के लिए बिजली चोरी पर रोकथाम लगानी होगी। इसके लिए आला अधिकारी कड़े निर्देश देते हैं। इसके अनुपालन में कार्रवाई भी कराई जाती है, लेकिन ये नाकाफी है। बिजली चोरी पर शिकंजा नहीं कसा जा सका। शहर में 21 प्रतिशत लाइनलॉस है। इसमें शहर के घनी आबादी वाले आम गली मोहल्ले तो हैं ही, बाजार भी अछूता नहीं। पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों की मानें तो बाजार के कई हिस्सों में भी बिजली चोरी बड़े पैमाने पर हो रही है। कटिया डालकर बिजली चोरी की जा रही। इसको लेकर भी निगरानी कराई जा रही है। फिलहाल कोई ठोस समाधान नहीं हो सका। व्यापारियों के विरोध को भी इसकी वजह माना जा सकता है।
इधर, बीते डेढ़ साल में ई-रिक्शा का चलन तेजी से बढ़ गया। शहर की सड़कों पर करीब डेढ़ हजार ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। इनसे ट्रैफिक सिस्टम तो ध्वस्त हुआ ही था, अब बिजली चोरी भी बढ़ गई है। ई- रिक्शा की बैटरी चार्ज करने के लिए कटिया डाली जा रही। आमतौर पर रात के अंधरे में ऐसा किया जा रहा। उनकी धरपकड़ के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। लाल रोड, खकरा, कबीर खां, फीलखाना, हाथीखाना, नई बस्ती, मेन बाजार, खुशीमल, मोहतसिम खां, शेर मोहम्मद समेत कई इलाकों में तारों के मकड़जाल हैं। घरों और दुकानों के नजदीक इन तारों पर कहां वैध कनेक्शन है और कहां कटिया, कुछ पता नहीं चलता।