समापन कार्यक्रम में बोलते सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी के सदस्य सीपी गोयल। स्रोत सोशल मीडिया
पीलीभीत। अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 की तैयारी को लेकर मुस्तफाबाद में आयोजित दो दिनी प्रशिक्षण शनिवार शाम को संपन्न हो गया। प्रशिक्षण का मुख्य आकर्षण कैमरा ट्रैपिंग तकनीक, उससे प्राप्त डाटा की पूर्ण शुद्धता और उसके व्यवस्थित संकलन पर रहा। नए दिशा-निर्देशों और अद्यतन तरीकों को समझकर सहारनपुर, बिजनौर, नजीमाबाद, शाहजहांपुर और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वन अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हो गए। अब 10 दिसंबर से फील्ड में बाघ गणना की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू की जाएगी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व को इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए नोडल केंद्र बनाया था। समापन सत्र में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बाघ गणना की पूरी रूपरेखा, तकनीकी चुनौतियों और सावधानियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। पूर्व वरिष्ठ आईएफएस और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी के सदस्य सीपी गोयल ने वन और वन्यजीव संरक्षण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि बाघ गणना में पगमार्क, मूवमेंट पैटर्न और कैमरा ट्रैप डाटा को अत्यंत सावधानी से दर्ज करना अनिवार्य है। फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन ने इस बार की बाघ गणना में शामिल नई तकनीकों और प्रक्रियागत बदलावों की जानकारी दी। वहीं डीएफओ मनीष सिंह और डीएफओ भरत कुमार डीके ने प्रत्येक चरण में सटीक रिपोर्टिंग, पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कैमरा ट्रैप स्थापित करने की विधि, पगमार्क पहचान, बाघों की गतिविधियों पर वैज्ञानिक निगरानी और डाटा संकलन के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी गई। समापन कार्यक्रम में सभी विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। मई 2026 तक पूरी गणना प्रक्रिया को पूरा किए जाने का लक्ष्य तय किया गया है।