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सलाखों के पीछे गूंज रहे देवी मंत्र हो रही इबादत

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पीलीभीत। परिस्थितियों, आवेश या कोई भी दूसरी वजह जिसने उन्हें कानून की नजर में अपराधी बना दिया है। मगर ऊपर वाले के दर पर आज भी इनके सिर नतमस्तक है। जिला कारागार में बंद 157 बंदी नवरात्र के व्रत और रमजान माह में रोजे रखकर दिन-रात पूजा और इबादत कर अपने ईश्वर से कृपा और खुदा से रहमतों की मांग कर रहे हैं।
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जिला कारागार में विभिन्न मामलों में 904 बंदी कैदी सजा काट रहे हैं। इन दिनों पवित्र नवरात्र और मुकद्दस रमजान माह चल रहा है। ऐसे में कई बंदी रोजा और नवरात्र का व्रत रख रहे हैं। यहां बंद 70 बंदी नवरात्र का व्रत रख रहे हैं। जिनमें 20 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा रमजान में 87 लोग रोजा रखकर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। सोमवार को श्रद्धालुओं ने सातवां नवरात्र व्रत रखकर मां भगवती से सुख-समृद्धि के साथ सभी कष्टों के समाप्त होने की कामना की। वहीं माह-ए-रमजान में सोमवार को छठा रोजा रखकर रोजेदारों ने अल्लाह तआला की इबादत कर रहमतों की दुआ की। पूजा और इबादत को लेकर यह आस्था भाव जेल की चहारदीवारी के अंदर भी है। दुनिया से जो उनके नाम के साथ अपराध का धब्बा लगा है उसे वो भले ही कोर्ट का फैसला अपने पक्ष में आने के बाद हटा दे, लेकिन, ऊपर वाले की अदालत में ये बंदी अपने कर्म और पूजा-इबादत का हिसाब रखकर गुनाहों से माफी मांगते हुए रहमतों की दुआ कर रहे हैं। जिला कारागार प्रशासन की ओर से इन बंदियों को व्रत और रोजे रखने के लिए सुविधा दी जा रही है। रोजेदारों के लिए सहरी से लेकर इफ्तार तक और नवरात्र का व्रत रखने वालों के लिए फलाहार का इंतजाम किया जा रहा है।
कारागार में 157 बंदी व्रत और रोजे रख रहे हैं। इन बंदियों के लिए सहरी- इफ्तार और फलाहार की व्यवस्था की गई है। दो टाइम उन्हें व्रत संबंधी सामान उपलब्ध कराया जाता है। - विक्रम सिंह यादव, डिप्टी जेलर
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