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बदहाल सिस्टम: पर्यावरण को पलीता लगा रहे 36 ईंट भट्ठे....बिना लाइसेंस चल रहे

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पीलीभीत। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की सख्ती के बाद जिले में पराली जलाने पर तो काफी हद तक अंकुश लगाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रदूषण की फैक्ट्री बने कुछ ईंट-भट्ठा बिना ईसी (पर्यावरण अनापत्ति) के ही संचालित हो रहे हैं। जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेकर जांच कराई तो करीब 36 ईंट भट्ठा बिना ‘पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र’ चले पाए गए। खनन निरीक्षक की रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई के लिए डीएम ने शासन को लिखकर भेजा है।
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जिले में करीब 180 ईंट भट्टे संचालित किए जा रहे हैं। भट्ठे के संचालन के लिए नियमानुसार माइनिंग प्लान और हर वर्ष पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण खनन विभाग में जमा करना होता है। इसमेें करीब 144 ईंट भट्टा संचालकों ने तो पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा कर दिए। वहीं 36 ईट भट्टा संचालक ऐसे हैं, जिन्होंने नया ‘पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र’ ही दाखिल नहीं किया है बल्कि पुराने प्रमाण पत्र के सहारे ही अपने धंधे को अंजाम दे रहे हैं। यह प्रमाण पत्र पर्यावरण विभाग लखनऊ से जारी होता है। जिले में सांठगांठ के चलते बिना पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र ईट भट्टे संचालित किए जा रहे हैं। मामला डीएम वैभव श्रीवास्तव के संज्ञान में आया तो उन्होंने मामले की गहनता से जांच कराई। जांच में 36 ईंट भट्ठा बिना पर्यावरण अनापत्ति प्रमाणपत्र के ही संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि जिन ईंट भट्ठा के ईसी नहीं बने हैं वह संचालित नहीं हो रहे हैं।
ये है ईंट भट्ठा संचालन के नियम
- ईंट भट्ठा आबादी से 200 मीटर दूर होना चाहिए
- पर्यावरण लाइसेंस और प्रदूषण विभाग से एनओसी जारी होनी चाहिए
- मिट्टी खनन को खनन विभाग की अनुमति जरूरी
- ईंट भट्ठा चलाने को जिला पंचायत और पर्यावरण विभाग की अनुमति लेना जरूरी
जिले में करीब 36 ईंट भट्ठा बिना पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र के संचालित हो रहे थे। खनन निरीक्षक की रिपोर्ट को जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को कार्रवाई के लिए भेजा गया है। -अरुण कुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट/ प्रभारी अधिकारी खनन
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