चुनाव की तैयारियों में अधिकारियों की अदूरदर्शिता सामने आई है। आयोग के आदेश पर नौ नवंबर से नामांकन पत्रों की बिक्री तो कराई गई, लेकिन बैंक की छुट्टियों के कारण चालान जमा करने की व्यवस्था नहीं की। इसके चलते सोमवार को स्टेट बैंक में चालान जमा करने को हजारों लोग पहुंच गए। स्थिति बिगड़ते देख डीएम ने मरौरी ब्लाक के निकट केंद्रीय विद्यालय में चालान जमा करने को चार काउंटर खुलवाए। इसके बाद भी आपा धापी रही।
दरअसल नामांकन पत्र जमा करने से पहले जमानत राशि के रूप में बैंक में चालान से शुल्क जमा करना पड़ता है। प्रधानी चुनाव के लिए नौ नवंबर से नामांकन पत्रों की बिक्री शुरू हुई। दीपावली की छुट्टियों के कारण बैंक चार दिनों के लिए बंद हो गए, इससे प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र तो खरीद लिए लेकिन चालान शुल्क जमा करने को भटकते रहे। सोमवार को सुबह नामांकन भी जमा करना था लेकिन उससे पहले उन्हें चालान जमा करने को स्टेट बैंक जाना पड़ा। एक साथ हजारों की संख्या में लोगों के पहुंचने से बैंक के बाहर जेपी रोड पर बैंक के परिसर के दोनों ओर काफी लंबी लाइनें लग गई। धीरे-धीरे स्थिति बेकाबू होने पर प्रशासन के हाथ पांव फूलने लगेे। जानकारी होने पर डीएम मासूम अली सरवर ने ट्रेजरी से रसीद बुक मंगवाकर अलग काउंटर खुलवाने के निर्देश दिए। इस पर मरौरी ब्लाक के निकट केंद्रीय विद्यालय में आनन-फानन में चार काउंटर लगवाकर चालान शुल्क जमा कराना शुरू किया। इससे प्रत्याशियों को कुछ राहत मिल सकी। लोगों का कहना था कि यदि प्रशासन यही व्यवस्था पहले से कर नामांकन फार्म बिक्री के साथ ही शुल्क जमा करा लेता तो समस्या से बचा जा सकता था।