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सैदपुर गांव में हुई थी रूठे स्वामी को मनाने के लिए पहली मुलाकात

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पीलीभीत। पहले भाजपा को छोड़कर सपा में गए और फिर सपा प्रत्याशी के तौर पर नामांकन कराने वाले स्वामी प्रवक्तानंद को नाम वापसी के लिए मनाने में भाजपा को कम मेहनत नहीं करनी पड़ी। भले ही अब भाजपाई इसे सर्जिकल स्ट्राइक करार देकर सोची समझी रणनीति का हिस्सा बता रहे हों, मगर सपा को पछाड़ने के लिए जमकर सियासत हुई। दिग्गजों की टीम लगाकर स्वामी प्रवक्तानंद से संपर्क साधा गया। उन्हें सम्मान दिलाते हुए वापसी का भरोसा दिलाया गया। गिले-शिकवे भी बैठकें कर दूर किए गए थे।
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स्वामी प्रवक्तानंद के भाजपा छोड़ने के बाद सपा नेता तो उन्हें अध्यक्ष पद पर जिताने में लग गए थे। अब भाजपाइयों की नजर उनसे हट गई है, ये मान लिया गया था। मगर ऐसा नहीं था। जिपं अध्यक्ष में जीत पाने के लिए भाजपाई सपा में सेंधमारी करने में जुट गए थे। बताते हैं कि सपा से कराए गए स्वामी प्रवक्तानंद के नामांकन के बाद भाजपा ने पहले प्रस्तावकों को तोड़ने का प्रयास किया। शहर विधायक संजय सिंह गंगवार को लगाया गया था। उनसे बातचीत का दौर चल रहा था। फिर भाजपा नेताओं की पहली मुलाकात नाम वापसी से दो दिन पहले हुई। ये मुलाकात सैदपुर गांव में एक स्थान पर काफी देर चली थी। इसमें जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह ने उन्हें ससम्मान वापसी को मनाना शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने संपर्क को टूटने नहीं दिया। नाराजगी की वजह पूछी गई और भाजपा प्रत्याशी डॉ. दलजीत कौर के पति भाजपा के निवर्ततान जिला महामंत्री गुरुभाग सिंह से भी मिलवाया गया था। दिग्गजों को जिम्मेदारी देने के साथ ही जिलाध्यक्ष उन्हें साधते चले गए। कई बड़े नेताओं से भी स्वामी प्रवक्तानंद की फोन पर बात कराई गई। उधर, सपा खेमे के एक जिला पंचायत सदस्य भी भाजपा के लिए मददगार साबित होते चले गए। कुछ आवश्यक जानकारियां भाजपा को इन्हीं से मिलती चली गईं। स्वामी की भाजपा में वापसी को आश्वस्त होने के बाद नाम वापसी से जुड़े अभिलेखों को पहले ही तैयार करा लिया गया था। अंतिम दौर में बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा के यहां भी लंबी बातचीत चली और फिर स्वामी प्रवक्तानंद की वापसी तय हो गई।
साख बचाने में कामयाब हुए, कद भी बढ़ा
जिपं अध्यक्ष के चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा था। चर्चाएं यहां तक बढ़ गई थी कि अगर सीट हाथ से निकलकर गई तो भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह पर भी गाज गिरेगी। पार्टी में भी इसकी चर्चा बढ़ गई थी। मगर जिलाध्यक्ष साख बचाने में कामयाब हो गए। अब निर्विरोध जीत ने कहीं न कहीं इन चर्चाओं पर विराम लगाया, बल्कि कद भी बढ़ा दिया है।
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स्वामी प्रवक्तानंद को जिस मुहिम के तहत विश्वास करके पार्टी ने सपा में एक तरह से सर्जिकल स्ट्राइक करने भेजा था। उसे बखूबी पूरा करके वापस आ गए। इस कदम से पार्टी में उनका सम्मान भी बढ़ा है। रही बात नाम वापसी से पहले संपर्क में रहने और साथ बैठक करने की तो, वह हमारे कार्यकर्ता हैं, उनसे लगातार संपर्क तो बना हुआ था। - संजीव प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा
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