एक प्रधान को पार्टी मेें
शामिल कराने को लेकर सत्ताधारी समाजवादी पार्टी धड़ों में बंटती दिख रही
है। जिलास्तर पर प्रधान को पार्टी में शामिल न किए जाने पर दूसरे गुट ने
इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया। दूसरे गुट ने पार्टी के प्रदेश
पदाधिकारियों से वार्ता के बाद प्रधान को पार्टी शामिल कर लिया। खास बात यह
कि जिलाध्यक्ष को शहर में रहते हुए भी इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
सपा
में यूं तो सरकार बनने के बाद से ही दो गुट दिखाई दे रहे हैं। लेकिन दोनों
कभी खुलकर सामने नहीं आए। इधर कुछ माह से दोनों की गुटबाजी सामने आने लगी
है। इसकी शुरूआत अमरिया को तहसील बनवाने के प्रस्ताव से शुरू हुई।
राज्यमंत्री के प्रयासों पर बरखेड़ा विधायक ने खुलकर विरोध करते हुए अपनी
विधानसभा क्षेत्र में लगने वाले सदर तहसील के गांव को शामिल न करने की मांग
की थी।
इसके बाद अब दूसरा मामला एक प्रधान को पार्टी में शामिल करने
को लेकर सामने आया है। कहा जा रहा है कि अभी तक भाजपा से जुड़े एक व्यवसायी
के पार्टनर रहे प्रधान को काफी समय से सपा में शामिल होने का प्रयास हो
रहे थे। सूत्रों की मानें तो उन्होंने जिलाध्यक्ष एवं अन्य पार्टी
पदाधिकारियों से संपर्क किया लेकिन उन्हें शामिल नहीं किया गया। इसके बाद
प्रधान ने पूरनपुर के विधायक पीतमराम और बरखेड़ा विधायक हेमराज वर्मा से
संपर्क साधा। दोनों विधायक प्रधान के साथ लखनऊ पहुंचे और पार्टी
पदाधिकारियों से मुलाकात की। लखनऊ से लौटकर बुधवार को दोनों विधायकों ने एक
होटल में संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित कर प्रधान को विधिवत पार्टी में
शामिल कराया है।
000000000000000
पार्टी में किसी को शामिल किए जाने
की जानकारी नहीं है। मैं सुबह पार्टी कार्यालय में काफी देर रहा। प्रधान को
कैसे शामिल किया गया है विधायक ही बेहतर बता सकते हैं।
- आनंद सिंह यादव, जिलाध्यक्ष
000000000
प्रधान
को प्रदेश अध्यक्ष से वार्ता के बाद शामिल कराया गया है। पार्टी संविधान
में विधायक को प्राथमिक सदस्य बनाने का अधिकार है। इसी के तहत प्रधान को
शामिल किया गया है।
- हेमराज वर्मा, विधायक बरखेड़ा