शासन, प्रशासन और व्यापारियों का गठजोड़ एक बार फिर किसानों पर भारी पड़ने जा रहा है। किसानों के पास से धान खत्म होने पर शासन ने कमीशन खरीद के आदेश दिए हैं। ऐसे में पूर्व में खरीदे गए स्टाक को सरकारी खरीद दर्शाकर कमीशन का बंदरबांट किया जाएगा।
छह माह हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी किसान एकड़ धान में जितनी बचत नहीं कर पाता उससे अधिक कमाई इसकी खरीद से जुड़े लोग कर लेते हैं। धान का सीजन शुरू होने पर किसान धान बेचने को दर-दर भटकता रहा लेकिन न तो सरकारी खरीद में तेजी आई और न ही सरकार ने कमीशन खरीद के आदेश दिए। इसका फायदा उठाकर व्यापारियों ने कम दाम पर धान खरीद कर स्टाक कर लिया। किसानों के पास धान की उपज खत्म होने के बाद आंकड़ों की जादूगरी से सरकारी खरीद दर्शायी जा रही थी। लेकिन अब सरकार ने धान की कमीशन खरीद का आदेश देकर इससे जुड़े लोगों को करीब ढाई प्रतिशत का लाभ और दे दिया है। राइस मिलों व व्यापारियों के गोदामों में मौजूद धान के स्टाक से सरकारी खरीद में चल रही आंकड़ेबाजी को अब कमीशन खरीद के आंकड़ों में दर्शाया जाएगा और इसमें मिलने वाले ढाई प्रतिशत कमीशन का भी बंटरबांट किया जाएगा। शासन के इस आदेश से किसानों का कोई भला होने वाला नहीं, हालांकि खरीद से जुड़े लोगों का भला जरूर हो जाएगा।