पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के लिए राहत भरी खबर है। पूरनपुर रेंज के गोपालपुर जंगल में निर्माणाधीन रेस्क्यू सेंटर का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। कार्यदायी संस्था ने 30 जून तक निर्माण कार्य पूरा करने का दावा किया है। इसके शुरू होने के बाद घायल, बीमार या हिंसक व्यवहार वाले बाघों और तेंदुओं को उपचार एवं पुनर्वास के लिए दूसरे शहरों के चिड़ियाघरों में नहीं भेजना पड़ेगा।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लंबे समय से रेस्क्यू सेंटर की जरूरत महसूस की जा रही थी। वर्तमान में किसी बाघ या तेंदुए के घायल होने, बीमार पड़ने अथवा उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव आने पर उसे उपचार और निगरानी के लिए प्रदेश के विभिन्न चिड़ियाघरों में भेजना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने करीब चार वर्ष पहले पीटीआर में रेस्क्यू एवं पुनर्वास केंद्र की मंजूरी दी थी।
14.33 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा रेस्क्यू सेंटर
पूरनपुर रेंज के गोपालपुर वन क्षेत्र में पांच हेक्टेयर भूमि पर 14.33 करोड़ रुपये की लागत से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना को चार चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में रेस्क्यू पुनर्वास केंद्र, खाद्य भंडार, अस्पताल, टॉयलेट ब्लॉक, बाउंड्रीवॉल और सीवर लाइन का निर्माण कराया गया। दूसरे चरण में सब स्टेशन, गार्ड रूम और पोस्टमॉर्टम रूम बनाए गए। तीसरे और चौथे चरण में ड्रेनेज, बायो सिक्योरिटी तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
हाल ही में प्रमुख सचिव वन वी. हेकाली झिमोमी ने निर्माणाधीन रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद निर्माण कार्य की रफ्तार बढ़ा दी गई है। टाइगर रिजर्व प्रशासन के अनुसार निर्माण पूरा होने के बाद बिजली कनेक्शन, उपकरणों की स्थापना और अन्य तकनीकी व्यवस्थाएं की जाएंगी, जिसके बाद केंद्र का संचालन शुरू हो सकेगा। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि रेस्क्यू सेंटर में चौथे चरण के कार्य तेजी से चल रहे हैं।अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं। कार्यदायी संस्था ने 30 जून तक निर्माण पूरा करने की बात कही है।