फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pilibhit Ground Report: जिले में विकास की रफ्तार कितनी? जानें रोजगार-स्वास्थ्य और खेल सुविधा के कितने हुए काम

Wed, 15 Jul 2026 03:36 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत

सार

Pilibhit Ground Report: अमर उजाला की ओर से यूपी के सभी जिलों में दौरा कर सरकारी योजनाओं और विकास दावों की जमीनी हकीकत परखी जा रही है। इसी कड़ी में सक्ष्य यूपी कार्यक्रम के तहत टीम पीलीभीत पहुंची। जहां पहले और अब के समय में क्या बदलाव हुआ। देखें यह रिपोर्ट।
विज्ञापन
Pilibhit Ground Report - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल बजने में अब एक साल से भी कम समय शेष है। इस बीच, राज्य के राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी चुनावी कमर कसनी शुरू कर दी है। इसी क्रम में, अमर उजाला की टीम ने सक्ष्म यूपी कार्यक्रम के तहत जमीनी हकीकत को टटोलने के लिए पीलीभीत जिले का दौरा किया है। इस पड़ताल का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के आम जनजीवन पर पड़े असर को समझना था। टीम ने जिले में सरकार के विकास के दावों की असल तस्वीर जानने का प्रयास किया। यह दौरा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी हकीकत को टटोलने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पड़ताल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों की समीक्षा की गई। इसका लक्ष्य यह समझना था कि सरकारी नीतियों का स्थानीय लोगों पर कितना प्रभाव पड़ा है। टीम ने यह भी देखा कि विकास के वादे कितने पूरे हुए हैं।

विज्ञापन


पड़ताल के प्रमुख बिंदु
अमर उजाला की टीम ने खिलाड़ियों के भविष्य संवारने के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। इसमें खेल के मैदान, प्रशिक्षण सुविधाएं और अन्य आवश्यक संसाधन शामिल थे। जिले को मिले नए फ्लाईओवर से यातायात जाम की समस्या पर क्या प्रभाव पड़ा है, इसका भी आकलन किया गया। यह जांच की गई कि फ्लाईओवर ने दैनिक आवागमन को कितना सुगम बनाया है और स्थानीय लोगों को कितनी राहत मिली है। वहीं लखपति दीदी के मोती की खेती से कितना लोगों को फायदा हुआ।

विज्ञापन

मोती की खेती से कितना बदली जिंदगी
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत को सक्षम यूपी बनाने के लिए आखिर किस तरीके के प्रयास हो रहे हैं। इसमें जो कुछ लोग अपना व्यवसाय करना चाहते हैं। उसमें सरकार ने आखिर किस तरीके की मदद की है। दरअसल, यहां एक व्यवसायी दंपती से बातचीत की गई। आखिर कैसे सरकार की उन्हें मदद मिली और अपने अलग-अलग प्रयासों के जरिए वो ना सिर्फ अपने लिए व्यवसाय जनरेट किया। बल्कि खुद आर्थिक तौर पर सक्षम हो रहे हैं। इसके अलावा कुछ और लोगों के लिए भी आजीविका का साधन इस वक्त यहां पर बन रहे हैं।

लखपति दीदी प्रमिला ने कैसे की शुरुआत
मोती व्यवसायी बादल कुमार और पत्नी 'लखपति दीदी' प्रमिला ने बताया कि सबसे पहले तो हम समूह से जुड़े। समूह के द्वारा ही हमें मार्गदर्शन मिला है। हमें मोती के बारे में तो पहले जानकारी नहीं थी। जो हमारे डीआरपी सर सुनील हैं। वो हमारे घर आए थे। घर आकर जानकारी दी कि प्रमिला मोती का काम है। आप अगर करने की इच्छुक हो तो आप कर सकते हो। आपको अगर आर्थिक सहायता में दिक्कत है तो हम समूह से अवेलेबल करा देंगे। हमने तो उनके प्रयास से किया। हमें समूह के द्वारा 3.5 लाख का अनुदान मिला। वो हमें देना है। जैसे ही हमारा मोती बिकेगा उसके बाद ही हमको वो पैसा लौटाना है। उसका जो ब्याज है वो हम कंटिन्यू हर महीने जमा कर रहे हैं। 

यहां वीडियो में देखें पूरी बातचीत


जिले में खिलाड़ियों को कितनी मिल रही खेल सुविधाएं
पीलीभीत के गांधी स्टेडियम में पहुंची टीम ने कोच और प्रैक्टिस कर रहे बच्चों से बातचीत की। बास्केट बॉल कोच ने कहा कि हम कोशिश करते हैं कि जितने छोटे बच्चे हमारे पास आते हैं। उन्हें कोई दिक्कत नहीं हो। यहां जो हमें बास्केट बॉल कोर्ट मिला है। पूरे यूपी में ऐसा कोर्ट बहुत कम है। ये हमारे खिलाड़ियों के लिए बहुत अच्छी बात है। यहां अगर बुनियादी सुविधाएं न हो तो वो आगे नहीं बढ़ सकता है। यहां हमारे पास ग्राउंड है। जो सबके लिए है। यहां सिर्फ पहले स्कूलों के पास कोर्ट था। अब हर बच्चा यहां आ सकता है। खेलो इंडिया और नौ साल में सरकार ने खेल को लेकर जो कदम उठाए उसको लेकर कोच ने कहा कि ग्रास रूट लेवल से जो भी बच्चे आते हैं, वो कभी आगे नहीं बढ़ पाते थे। खेलो इंडिया से ग्रास रूट के बच्चे अब पकड़ में आते हैं। अब हमें पता रहता है कि किस बच्चे पर कितनी मेहनत करनी है।  

यहां वीडियो में देखें पूरी बातचीत


मेडिकल कॉलेज आने से मरीजों को कितनी मिल रही सुविधाएं

पीलीभीत में बने मेडिकल कॉलेज में लोगों को कैसी सुविधाएं मिल रही हैं। इसकी पड़ताल के लिए टीम वहीं पहुंची और बातचीत की। तीमारदार रूप राम ने बताया कि यहां सुविधाएं ठीक हैं। यहां इलाज अच्छा हो रहा है। पहले देखभाल कम थी। लेकिन अब दवा और देखभाल अच्छी हो रही है। साफ सफाई भी है। यहां पहले कोई सफाई नहीं थी। तीमारदार विशाल ने बताया कि अस्पताल अच्छा है। डॉक्टर भी अच्छा इलाज कर रहे हैं। यहां पहले से ज्यादा सुधार हुआ है। पहले यहां आते थे लेकिन अब सुविधाएं और बेहतर हुई हैं। तीमारदार राम बेटी ने बताया कि यहां बहुत बढ़िया इलाज हो रहा है। टाइम से दवा मिल रही है। देखभाल भी हो रही है। पहले से यहां ज्यादा सुधार हुआ है। 

यहां वीडियो में देखें पूरी बातचीत


फ्लाईओवर की सौगात, कितनी कम हुई लोगों की परेशानी
स्थानीय बागेश से पूछा की पुल बनन से पहले यहां कैसे हालात थे। तो जवाब देते हुए कहा कि यहां पहले बहुत बुरी हालत थी। नीचे पुल से आते थे। तो बहुत जाम था। लेकिन पुल बनने से बहुत राहत मिली है। पहले यहां पर बहुत टाइम लगता था। अब 15 मिनट लगते हैं। आधे घंटे से ज्यादा का टाइम लगता था। आगे कहा कि सरकार काम अच्छा कर रही है। पहले से ज्यादा काम हुआ है सरकार में। वहीं स्थानीय सलीम हुसैन ने कहा कि यहां फ्लाईओवर बनने से बहुत बड़ी राहत मिली है। आने वाले समय में राहत मिलेगी। इससे पहले यहां बहुत ज्यादा एक्सीडेंट होते थे। लेकिन अब यहां दुर्घटनाएं कम हो गई हैं। पहले यहां 100 से 200 लोग जाम में हर दिन फंस जाते थे। पहले यहां एक-एक घंटे जाम में परेशान होते थे। एंबुलेंस भी फंस जाती थी। आने-जाने में बहुत दिक्कत होती थी। 

यहां वीडियो में देखें पूरी बातचीत


स्टेडियम बनने से खिलाड़ियों को कितना मिला लाभ
उप क्रीडाधिकारी जयवीर सिंह ने बताया कि जनपद पीलीभीत में जो यह हमारा स्टेडियम है। गांधी स्टेडियम के नाम से है। यह लगभग 13 एकड़ भूमि पर बना है। हम इसमें लगभग जितने खेल हैं ज्यादातर खेलों की सुविधाएं हैं। हम यहां चार कोर्ट का बैडमिंटन हॉल है। हम और सिंथेटिक बास्केटबॉल कोर्ट है। हम और वॉलीबॉल कोर्ट है। हम और डाइविंग पूल वाला हमारा 50/21 मीटर का स्विमिंग पूल है। जिसके साथ एक छोटा लर्निंग पूल भी बना है। इसी के साथ-साथ वेटलिफ्टिंग रूम है। हमारे पास आधुनिक जिम की सुविधा है। हम इसके अतिरिक्त एथलेटिक्स का 400 मीटर का ट्रैक है। फुटबॉल फील्ड है। क्रिकेट प्रैक्टिस पिच है। हम जो अभी वित्तीय वर्ष 2024-25 में बनी थी। हम जिसमें बास्केटबॉल और आपका क्रिकेट पिच हम बैडमिंटन हॉल का एक्सटेंशन हुआ था। और अभी सबसे बड़ी बात यह है कि गांधी स्टेडियम के इस मैदान पर लगभग 926 लाख की लागत का एक हॉकी एस्ट्रोटफ का मैदान बनाया जा रहा है। जिससे बच्चों को आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय लेवल की सुविधाएं मिलेंगी।

यहां वीडियो में देखें पूरी बातचीत


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें