कारण है कि सरकार की ओर से एक जिला-एक उत्पाद में शामिल इस उद्योग को आशातीत लाभ नहीं मिल पा रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के बाद बाहर से कच्चा माल मंगाने पर हो रहा खर्च निकालना दूभर हो रहा है। इधर, बांसुरी के ऑर्डर भी नहीं मिल पा रहे हैं। कच्चा माल खराब हो रहा है।
जन्माष्टमी के लिए मथुरा से अब तक नहीं आई डिमांड
जन्माष्टमी पर्व को लेकर हर साल मथुरा से बांसुरी का बड़ा ऑर्डर मिलता था, लेकिन इस बार वहां बाढ़ के कारण अब तक ऑर्डर नहीं मिला है। मथुरा में आने वाले विदेशी पर्यटक बांसुरी को प्रसाद के तौर पर खरीद कर ले जाते हैं। लोकल में भी बिक्री ठीक नहीं हो रही है। स्थानीय स्तर से भी मांग नहीं आ गई है।
बांसुरी उद्योग से जुड़ीं मोहल्ला बसीर खां की रहने वाली हिना ने बताया कि मौजूदा समय में बांसुरी को लेकर अभी कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बन सकी है। मांग भी काफी कम हो गई है। शहर में करीब तीन दशक पहले दो हजार परिवार इस काम में लगे थे। अब मात्र दो-तीन सौ परिवार ही रह गए हैं।