पीलीभीत। पहले तो कोरोना ने ही व्यवसाय चौपट हो गया। रही-सही कसर डीजल के बढ़े दामों से पूरी हो गई। बीते कुछ दिनों से डीजल-पेट्रोल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद मालभाड़ा के दामों ने ट्रक मालिकों और ट्रांसपोर्टरों की मुसीबत बढ़ा दी है। कोरोना महामारी में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पहले से ही ठप है। अब डीजल-पेट्रोल के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आधे से ज्यादा ट्रक खाली आकर खड़े हो गए हैं। माल भेजने वालों की संख्या में सामान्य दिनों की तुलना में बड़ी कमी आई है। मालभाड़ा बढ़ने से जरूरी सामान और सब्जियां ही आ रही हैं। बाकी कारोबार न के बराबर है।
डीजल के दाम एक जून को 64.18 रुपये लीटर थे। अब यह बढ़कर 72.72 रुपये प्रति लीटर तक आ पहुंचे हैं। यानी 27 दिन में 8.54 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। डीजल के दामों में हुई इस बेतहाशा वृद्धि का सीधा असर ट्रांसपोर्टरों और ट्रक मालिकों पर पड़ा है। इसी के चलते ट्रांसपोर्टरों ने मालभाड़े में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी। मगर, मालभाड़े में बढ़ोतरी का नतीजा यह निकला कि व्यापारी वर्ग ट्रांसपोर्टरों से माल मंगाना ही धीरे-धीरे बंद करता जा रहा है, वे आगे भाड़ा कम होने का इंतजार कर रहे हैं।
आलम यह है कि जनपद में आधे से अधिक ट्रक खाली खड़े हुए हैं। ट्रकों के खाली खड़े होने से अब ट्रक मालिकों को आर्थिक दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। ट्रक मालिकों को ड्राइवर और हेल्पर की तनख्वाह के अलावा बैंक की किस्तें भी देनी होती हैं। आमदनी कम होने से ट्रांसपोर्टर इसमें उलझकर रह गए हैं। ट्रक मालिकों का कहना है कि यदि देश में ऐसे ही हालात रहे तो ट्रक व्यवसाय बंद करके कुछ और करना पड़ेगा। इधर, ट्रांसपोर्टर भी फंसे हुए हैं। उनका कहना है कि जब माल मंगाने वालों मालभाड़ा बढ़ाकर देने की बात कहते हैं तो वे माल मंगाने से ही मना करने लगते है। ट्रांसपोर्टर का कहना है कि महंगाई कम करने का दावा करने वाली सरकार को कम से कम डीजल-पेट्रोल जैसी जरूरी चीजों के दाम हर हाल में नियंत्रित करने चाहिए। अन्यथा, हालात काबू से बाहर हो जाएंगे।
पहले लॉकडाउन और अब डीजल बढ़ोतरी से बेड़ा गर्क
ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पहले 70 दिन के लॉकडाउन और अब डीजल के दामों में बढ़ोतरी होने से दिन प्रतिदिन प्रभावित होता जा रहा है। व्यापारी अपेक्षा करते हैं कि उनका माल मुनासिब दाम में पहुंच जाए, मगर मालभाड़े में बढ़ोतरी से ऐसा संभव नहीं है। - रिया सूरी, ट्रांसपोर्ट कारोबारी
डीजल के दाम बढ़ने पर खाली खड़े हैं ट्रक
देश में जब अनलॉक हुआ तो कुछ उम्मीद थी कि कारोबार ठीक चलेगा। मगर, डीजल के दाम अब इतने बढ़ गए हैं कि व्यापारियों ने माल मंगाना ही बंद कर दिया है। मजबूरन ट्रक मालिकों को अपने ट्रक खाली खड़े करने पड़ रहे हैं। मालभाड़ा तो डीजल के दाम से ही तय होता है। कोरोना के संकट में सरकार से ही लोगों की उम्मीदें हैं। डीजल और पेट्रोल के दामों को कम करना चाहिए, ताकि महंगाई नियंत्रित रहे। - अमित अग्रवाल, ट्रक मालिक
खड़े ट्रकों पर भी करना पड़ता है खर्च
कोरोना के चलते व्यापार पहले से ही कम था। रही-सही कसर डीजल के बढ़ते दामों ने पूरी कर दी। कारोबार चौपट होता जा रहा है। मार्केट में भी खासी मंदी चल रही है। इसकी वजह से ट्रक खाली खड़े हैं, मगर हमें तो खाली ट्रकों पर भी बीमा, चालक आदि का खर्च करना पड़ता है। हालात पिछले तीन महीने से बेहद खराब हैं। यदि इसमें सुधार नहीं हुआ तो महंगाई की मार कहीं का नहीं छोड़ेगी। - भानु सिंह, ट्रक मालिक
मंदी के चलते कारोबार पड़े हैं ठप
पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से ढुलाई का खर्चा बढ़ गया है। ऊपर से कारोबार भी खासी मंदी झेल रहा है। महंगी ढुलाई तो तब दी जाए जब काम हो। कारोबार ही नहीं है तो महंगी ढुलाई देकर माल मंगाने से क्या फायदा है। यदि माल मंगवा भी लिया तो पार्टी रेट देने को तैयार नहीं है। अब करें भी क्या करें। सरकार को ठोस रणनीति बनानी चाहिए, नहीं तो इसका खामियाजा व्यापारियों के साथ आम जनता को भी भुगतना पड़ेगा। - धर्मेंद्र चौहान, व्यापारी