लखीमपुर से लेकर गोरखपुर तक के अभ्यर्थियों का सेंटर पड़ा था पीलीभीत में
निजी बसों में 300 रुपये वसूला गया लखीमपुर से पीलीभीत तक का किराया
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) की प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (पीईटी) रविवार को समाप्त हो गई। नौकरी का सपना संजोकर परीक्षा देने आए हजारों अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक आने के लिए यातायात सुविधाओं की कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ा। प्राइवेट बसों ने दो गुना किराया वसूला, भीड़ में धक्के खाने पड़े। परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों से जब बात की तो उनका दर्द सामने आया।
पीईटी शनिवार और रविवार को दो पालियों में हुई। शनिवार दूसरी पाली के बाद असम चौराहे पर बसों में बेतहाशा भीड़ रही। रविवार को स्थिति और खराब नजर आई। कई अभ्यर्थी रविवार को अपने साथियों के साथ घर लौटे। सबसे ज्यादा परेशानी लखीमपुर जिले के अभ्यर्थियों को उठानी पड़ी, क्योंकि वहां से पीलीभीत के लिए कोई ट्रेन नहीं चलती। लिहाजा बसों से ही यहां आना पड़ा, जिसका फायदा प्राइवेट बस संचालकों ने खूब उठाया।
अभ्यर्थियों के अनुसार, लखीमपुर से पीलीभीत तक का 300 रुपये किराया वसूला गया, जबकि रोडवेज बसों का किराया इससे काफी कम है। ज्यादा किराया देने के बाद भीड़ से भी जूझना पड़ा। अगर यातायात की बेहतर व्यवस्था होती तो उनको इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
ई-रिक्शा वालों ने भी खूब काटी जेब
असम चौराहे से गौहनिया चौराहा या जिला अस्पताल तक ई-रिक्शा वाले अमूमन दस रुपये किराया लेते हैं, लेकिन शनिवार और रविवार शाम को ई-रिक्शा चालकों ने खूब मनमाना किराया वसूला। किसी से बीस तो किसी से तीस रुपये तक किराया वसूला गया।
रविवार को भी रही जाम की स्थिति
पीईटी के चलते शनिवार को पूरे शहर में जाम की स्थिति रही। गौहनिया चौराहा, छतरी चौराहा, असम चौराहा, उपाधि कॉलज रोड पर लंबा जाम रहा। रविवार को पहली और दूसरी पाली की परीक्षा के बाद करीब आधा घंटा जाम लगा रहा।
गोरखपुर से यहां सेंटर डालने का कोई औचित्य नहीं था
इस रूट पर ट्रेन की बहुत दिक्कत हुई। शनिवार रात आना पड़ा था। इतनी दूर सेंटर नहीं डालना चाहिए था। हमारे साथ ही कई लोग गोरखपुर से यहां परीक्षा देने आए हैं।
- दिव्या, गोरखपुर
प्राइवेट बस से आया हूं। तीन सौ रुपये किराया लगा। पीलीभीत रूट पर रोडवेज बसों का कोई भरोसा नहीं। उधर से आने वाले अभ्यर्थियों ने मिलकर पूरी बस बुक की। रोडवेज की अच्छी सुविधा होती है तो परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
- उमेश मौर्या, लखीमपुर
अगर लखीमपुर से पीलीभीत तक ट्रेन चलती तो इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती। रोडवेज बसों की भी बेहतर सुविधा नहीं है। मजबूरन प्राइवेट बस से आना पड़ा। किराया भी तीन सौ रुपये चुकाना पड़ा।
- जय प्रताप, लखीमपुर
शनिवार को पति के साथ बाइक से आए थे। पति ने शनिवार को परीक्षा दी। लखीमपुर से आने में परेशानी तो हुई, लेकिन ट्रेन की सुविधा न होने के कारण बाइक से आए। रोडवेज बसों का हाल बहुत बुरा है।
- शीतल, लखीमपुर