टीओटीआर प्रोजेक्ट में स्थानीय समुदायों और इको विकास समितियों (ईडीसी) की अहम भूमिका तय की गई है। कार्ययोजना के तहत ईडीसी का क्षमता विकास किया जाएगा और उन्हें वन एवं वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत सक्रिय किया जाएगा। डीएफओ भरत कुमार डीके ने बताया कि जंगल से बाहर बाघों के प्रबंधन के लिए टीओटीआर प्रोजेक्ट को इसी वित्तीय वर्ष में लागू किया जाना है। वार्षिक कार्ययोजना तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दी गई है।
प्रथम चरण में होंगे ये प्रमुख कार्य
प्रस्तावित कार्ययोजना के अनुसार पहले चरण में डीएफओ समेत वन अधिकारियों और वन कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें देश के कई टाइगर रिजर्वों में भेजा जाएगा, जहां वे एआई आधारित तकनीक, आधुनिक निगरानी प्रणाली और रेस्क्यू प्रबंधन की जानकारी हासिल करेंगे। इसके साथ ही रेस्क्यू वाहनों, ड्रोन, पिंजरे और अन्य सुरक्षा उपकरणों की खरीद की जाएगी। ड्रोन ऑपरेटर और बायोलॉजिस्ट की तैनाती भी प्रस्तावित है, ताकि जंगल से बाहर बाघों की गतिविधि पर बेहतर नजर रखी जा सके।