माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग पर बंद पड़ा कलीनगर पुल पर आवागमन। संवाद
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माधोटांडा। नेपाल सीमा से सटे करीब 50 गांवों को जिला मुख्यालय और उत्तराखंड से जोड़ने वाले डगा और कलीनगर पुलों की मरम्मत की प्रक्रिया दस माह बाद भी एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है। दोनों पुलों पर दरारें आने के बाद आवागमन बंद कर दिया था, लेकिन विभागीय दावे सर्वे और प्रस्ताव भेजने तक ही सीमित हैं। नतीजतन ग्रामीणों, व्यापारियों और पीटीआर के पर्यटन पर भी इसका असर लगातार बढ़ रहा है।
बाइफरकेशन से निकलने वाली हरदोई ब्रांच नहर पर बने डगा और कलीनगर पुल पर भारी वाहनों का वर्षों से दबाव रहा। पुलों की मियाद पूरी होने के बाद लगभग दस माह पहले दोनों पुलों में बड़ी दरारें पड़ गईं। सुरक्षा की दृष्टि से लोक निर्माण विभाग ने आवागमन पूरी तरह रोककर ग्रिल और दीवार लगाकर पुल बंद कर दिए। इसके बाद माधोटांडा–पीलीभीत और पूरनपुर–खटीमा मार्ग पर आवाजाही बेहद कठिन हो गई है। छोटे वाहन कच्ची नहर किनारे रास्ते से जोखिम लेकर गुजर रहे हैं, जबकि भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। पूर्व में हेडवर्क्स खंड, लोक निर्माण विभाग और सेतु निगम की संयुक्त टीमों ने सर्वे कर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। पुलों को निर्माण योजना में शामिल भी किया लेकिन अब तक स्वीकृति न मिलने से काम आगे नहीं बढ़ा है। प्रशासनिक मशीनरी की धीमी कार्रवाई से क्षेत्र की परेशानी जस की तस है। अधिशासी अभियंता लोक निर्माण राजेश चौधरी के अनुसार सेतु निगम की ओर से पुलों की प्रक्रिया देखी जा रही है। हालांकि दोनों पुल कार्ययोजना में शामिल हैं।
पुल बंद होने से व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था चरमराई
डगा और कलीनगर पुलों का बंद होना क्षेत्रीय व्यापारियों के लिए संकट बन चुका है। करीब दो लाख की आबादी को सीधे प्रभावित करने वाले इन मार्गों पर बड़े वाहनों की आवाजाही रुकने से आवश्यक सामग्री की सप्लाई अनियमित हो गई है। पीलीभीत और उत्तराखंड से आने वाले खाद्य पदार्थ, मोरिंग, बजरी समेत निर्माण सामग्री के ट्रक समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि पहाड़ और शहर से आने वाली सामग्री में देरी होने से लागत बढ़ रही है और व्यापार प्रभावित हो रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि पुलों के निर्माण की शुरुआत कब होगी, इस पर भी अब तक कोई स्पष्टता नहीं है। इससे क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ रही है।