माधोटांडा। अंग्रेजों के जमाने में बनी प्रदेश की महत्वपूर्ण सिंचाई नहरों की पटरियों पर खड़ंजा निर्माण का मामला टाइगर रिजर्व प्रशासन और सिंचाई विभाग के बीच अटका हुआ है। सिंचाई विभाग इन जर्जर पटरियों पर मरम्मत और खड़ंजा लगाकर सुरक्षित मार्ग तैयार करना चाहता है लेकिन टाइगर रिजर्व प्रशासन ने एनटीसीए अनुमति का हवाला देकर कार्य पर रोक लगा दी है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार खड़ंजा निर्माण का बजट तीन वर्ष पूर्व स्वीकृत हो चुका है लेकिन बीते दो साल से काम शुरू नहीं हो पा रहा है। कलीनगर क्षेत्र के बाइफरकेशन में सिंचाई परियोजना का मुख्यालय है। उत्तराखंड से आने वाली शारदा मुख्य कैनाल से बाइफरकेशन में तीन अन्य नहरों को निकाला है। इसमें हरदोई ब्रांच, खीरी ब्रांच और शारदा फीडर नहर शामिल है।
अंग्रेजों के जमाने में बनी इस महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना को मजबूती देने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से पटरियों आदि को भी मजबूत करने पर जोर दिया जाता है, लेकिन पीटीआर में खड़ंजा आदि कार्य पर रोक लगा दी है। सिंचाई विभाग का कहना है कि नहरों की कमजोर पटरियों के कारण निरीक्षण, मरम्मत और सामग्री ले जाने में भारी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
रिजर्व क्षेत्र में झाड़ी सफाई पर प्रतिबंध ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। अधिकारियों का तर्क है कि जब पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर रिजर्व क्षेत्र में कई रिजॉर्ट्स बन चुके हैं तो केवल नहर मार्गों पर खड़ंजा लगाने से आपत्ति समझ से परे है। सहायक अभियंता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि हरदोई ब्रांच नहर की दाईं पटरी पर लगा खड़ंजा पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आसान आवागमन का माध्यम बना हुआ है। ऐसे में अंग्रेजों के जमाने से बने इन ऐतिहासिक नहर मार्गों पर खड़ंजा निर्माण आवश्यक है ताकि सिंचाई व्यवस्था, कर्मचारियों की सुरक्षा और पर्यटन तीनों को लाभ मिल सके। ऐसे में रोक हटाने को टाइगर रिजर्व प्रशासन से पत्राचार किए हैं।