पीलीभीत/ अमरिया। जिले में दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान और अन्य प्रदेशों में पंजीकृत स्लीपर बसों का मालवाहक वाहनों के रूप में उपयोग कर कमाई हो रही है। यात्रियों की जगह सीटों और गैलरी में कपड़े और अन्य सामान भर दिया जाता है। छत पर चार से पांच फुट ऊंचाई तक सामान लादते हैं। डिकी सामान से फुल रहती है। एक बड़ा नेटवर्क इस पर काम कर रहा है। चर्चा है कि इस खेल से परिवहन, पुलिस और जीएसटी सभी विभाग वाकिफ हैं लेकिन नजरें फेर कर बैठे हैं।
स्लीपर बसों से कपड़े और अन्य सामान का सबसे अधिक परिवहन अमरिया कस्बे से होता है। यहां रोजाना सुबह से देर शाम तक दिल्ली, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश के नंबर की स्लीपर बसें खड़ी रहती हैं। दिल्ली और अन्य स्थानों से आना वाला सामान यहां उतारा जाता है। अमरिया और जिले के अन्य स्थानों से जाने वाले जैकेट, कपड़े और अन्य सामान को बसों में लादा जाता है। इन बसों में यात्रियों को नहीं बैठाया जाता है। सिर्फ दिखावा भर के लिए पांच से सात सवारियों को बैठाकर देर शाम बसों को रवाना कर दिया जाता है।
अरुणाचल प्रदेश की बस की छत पर चार फुट ऊंचाई तक सामान
शनिवार की दोपहर अमरिया कस्बे में सड़क किनारे खड़ी अरुणाचल प्रदेश के नंबर की स्लीपर बस की छत पर करीब चार फुट ऊंचाई तक सामान लदा दिखा। सामान को काले तिरपाल से ढका गया था। तिरपाल के नीचे से हरे रंग के बोरे नजर आ रहे थे। बस के अंदर सामान ही रखा था।
प्रधान जी की बस से ढोया जाता है सिर्फ सामान
अमरिया कस्बे में ही खड़ी बस्ती जिले में पंजीकृत बस की छत और अंदर गैलरी में सामान के बोरे ही रखे थे। शीशे पर चौधरी बस सर्विस अमरिया से दिल्ली और प्रधान जी लिखा था। बस के पास नीचे जमीन पर भी कपड़े लदे बोरे पड़े थे। इन्हें बस के अंदर सीटों पर रखे जाने की तैयारी हो रही थी। आपातकालीन गेट का उपयोग कपड़ों के बैग और अन्य सामान भरने में होता नजर आया।
दिन के उजाले में हो रही कमाई, जीएसटी और परिवहन विभाग फेल
अमरिया कस्बे में स्लीपर बसों से सामान ढोने का खेल दिन के उजाले में होता है। बसों में सामान दिन के समय भरा जाता है। बस शाम के समय गंतव्य को रवाना होती है। परिवहन विभाग के अफसर और जीएसटी सचल दल भी सक्रिय रहते हैं। इसके बाद भी इन बसों का नजर न आना कई सवाल खड़े कर रहा है। मिलीभगत की चर्चाएं भी हैं। कस्बे में जहां ये बसें खड़ी होती हैं। आसपास के लोगों का कहना है कि सभी अफसरों को इसकी जानकारी है लेकिन इस ओर ध्यान नहीं देते हैं।
बसों से कपड़े और अन्य सामान परिवहन के मामले में लगातार जांच और कार्रवाई की जा रही है। जरूरी प्रपत्र न मिलने पर तीन-चार दिन पहले भी एक बस से जुर्माना जमा कराया है। प्रत्येक माह दो से तीन बसों पर कार्रवाई की जाती है। - करमवीर सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर सचल दल जीएसटी
नियमों की अनदेखी कर संचालित दूसरे प्रदेशों की स्लीपर बसों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। आज भी एक बस को पकड़ा गया है। सामान परिवहन को लेकर जीएसटी टीम के साथ मिलकर भी अभियान चलाया जा रहा है। अमरिया कस्बे से संचालित बसों की जांच की जाएगी।- वीरेंद्र सिंह, एआरटीओ
अमरिया कस्बे में खड़ी स्लीपर बस की छत पर तीन से चार फुट ऊंचाई तक लदा सामान। संवाद
अमरिया कस्बे में खड़ी स्लीपर बस की छत पर तीन से चार फुट ऊंचाई तक लदा सामान। संवाद