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पचास हजार लीटर मिलावटी दूध पी रहे लोग

सार

बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए यदि आप उन्हें दूध पिला रहे हैं, तो यह भ्रम निकाल दें।खाद्य सुरक्षा टीमों द्वारा लिए सैंपल इसकी पुष्टि कर रहे हैं।स्टार्च युक्त दूध का रंग नीला हो जाता है तो मान लीजिए दूध मिलावटी है।
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एकता नगर कॉलोनी में दूध देने जाता दूधिया। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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विस्तार
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पीलीभीत। बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए यदि आप उन्हें दूध पिला रहे हैं, तो यह भ्रम निकाल दें। आपको यह जानकार हैरानी होगी बच्चे जो दूध पी रहे हैं, वह मिलावटी है। ऐसा इसलिए कहा सकता है, क्योंकि जिले में उत्पादन के मुकाबले दूध की खपत कहीं ज्यादा है। एक अनुमान के मुताबिक एक दिन में 50 हजार लीटर मिलावटी दूध बेचा जा रहा है। खाद्य सुरक्षा टीमों द्वारा लिए सैंपल इसकी पुष्टि कर रहे हैं। जांच में दूध के 42 फीसदी नमूने फेल निकल रहे हैं।
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एक अप्रैल से अब तक 135 से ज्यादा नमूनों की जांच रिपोर्ट विभाग को मिल चुकी है। इसमें 67 खाद्य पदार्थों के नमूने फेल हुए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 22 नमूने दूध के हैं। जांच में पाया गया कि दूध में फेट कम है और भारी मात्रा में पानी भी मिलाया गया है। जिले में दुधारू पशुओं की संख्या करीब 40 हजार है। पशुपालन विभाग का मानना है कि पश्चिमी जिलों के मुकाबले तराई के अपने जिले में पशु कम दूध देते हैं। यहां एक पशु के दूध देने की क्षमता औसतन करीब तीन लीटर का है। इस हिसाब से करीब 1.20 लाख लीटर प्रतिदिन दूध का उत्पादन होता है।
दूसरी ओर खपत की बात करें तो दुग्ध विकास विभाग 90 ग्राम दूध प्रति व्यक्ति खपत मानता है। विभागीय अफसरों का कहना है कि अभी कोई डाटाबेस नहीं है, लेकिन अनुमान है कि प्रतिदिन करीब 1.70 लाख लीटर से ज्यादा दूध की प्रतिदिन की खपत होती है। अब सवाल यह है कि जिले में 50 हजार लीटर दूध रोजाना कहां से आ रहा है। साफ है कि रोजाना जिले में 50 हजार मिलावटी दूध बेचा जा रहा है।
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मिलावटी दूध बेचने और दूूूध का नमूना फेल होने पर पूरनपुर में दो डेयरी संचालकों पर भारी जुर्माना लग चुका है। एक से सवा लाख तो दूसरी से डेढ़ लाख का जुर्माना वसूला गया। दोनों नमूने भैंस के दूध के थे। इन डेयरियों पर खुले दूध की बिक्री की जा रही थी। नमूनों की जांच में दूध में फेट की मात्रा काफी कम थी।
जिले में 15 निजी डेयरियां और 35 समितियां
दुग्ध विकास विभाग के स्थानीय प्रभारी मनोज गंगवार के मुताबिक जिले में 15 निजी डेयरियां संचालित हैं। इसके अलावा दुग्ध विकास विभाग की 35 समितियां हैं। पूरनपुर रोड पर विभाग का एक प्लांट भी लगा है। यहां जिले से संकलित दूध को एक तापमान तक ठंडा किया जाता है और उसके बाद बरेली की पराग फैक्टरी में भेज दिया जाता है। वहीं से अलग-अलग जिलों में दूूध भेजा जाता है।
दूध में मािलावट की ऐसे करें पहचान
दूध में स्टार्च की मिलावट जांचने के लिए टिंक्चर आयोडीन की कुछ बूंद मिलाएं। स्टार्च युक्त दूध का रंग नीला हो जाता है तो मान लीजिए दूध मिलावटी है। इसके अलावा दूध में वनस्पति की मिलावट जांचने के लिए तीन से पांच मिलीलीटर दूध एक परखनली में लेकर उसमें दस बूंद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और एक चम्मच चीनी मिलाएं। पांच मिनट बाद लाल रंग दिखाई देने लगे तो दूध में वनस्पति मिलावट होने की पुष्टि होती है।
हर महीने दूध के करीब 20 नमूने लिए जाते हैं। इसमें ज्यादातर खुला दूध होता है। 42 फीसदी नमूने फेल होते हैं। मिल्क हॉकरों पर अधिकतम 25 हजार और डेयरी संचालकों पर अधिकतम पांच लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। -शशांक त्रिपाठी, सहायक आयुक्त, खाद्य
बच्चों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीएस यादव बताते हैं कि सबसे ज्यादा मिलावट दूध और दूध से बनने वाले उत्पाद में होती है। अगर दूध में गंदा पानी मिला दिया गया तो उसके हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस अंदर पहुंचकर उल्टी, दस्त, पीलिया, टाइफाइड जैसी बीमारी के कारण बन जाते हैं। दूध में यूरिया भी मिला दिया जाता है जो किडनी खराब कर सकता है। मिलावटी दूध बच्चों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है।
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