पीलीभीत। जिले में निजी वाहनों का धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। चौक-चौराहों से सवारियां बैठाने के साथ ही ट्रैवल एजेंसियां बनाकर बुकिंग भी की जा रही है। मनमाने तरीके से संचालित यह वाहन सवारियों की जेब तो ढीली कर ही रहे, परिवहन विभाग को भी करोड़ों रुपये के राजस्व की चपत लगा रहे हैं।
जिले में कुल 19,024 वाहनों का पंजीकरण निजी वाहनों के रूप में है। वहीं 2,025 वाहनों का ही व्यावसायिक पंजीकरण कराया गया है। व्यावसायिक रूप में पंजीकृत वाहनों से हर तीन माह में टैक्स लिया जाता है। ऐसे में कई वाहन संचालक निजी परमिट पर ही धड़ल्ले से सवारियां ढो रहे हैं।
यह लोग परिवहन विभाग को टैक्स दिए बिना ही वाहन का टैक्सी के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। नियमानुसार इन वाहनों पर कार्रवाई का प्रावधान है। बावजूद जिम्मेदार इन वाहनों पर रोक नहीं लगा पा रहे हैं।
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वाहन स्वामी करते हैं मनमानी
निजी वाहन स्वामी बुकिंग के दौरान मनमानी करते है। रात के समय वाहन किराये पर लेने पर किराया एक हजार से 1200 तक बढ़ा दिया जाता है। यह वाहन स्वामी किसी तरह का कोई बिल भी ग्राहक को उपलब्ध नहीं करा रहे है।
फैक्ट फाइल
निजी वाहनों की संख्या
कुल पंजीकृत वाहन 19,024
सात सीट वाली कार 4,764
पांच सीट वाली कार 14,260
व्यावसायिक पंजीकृत वाहन 2,025
जुर्माने का है प्रावधान
निजी वाहनों में पंजीकृत वाहनों से किसी तरह का टैक्स नहीं लिया जाता है, जबकि व्यावसायिक पंजीकरण में सात सीट व पांच सीट वाले कार मालिकों से हर तीन माह में टैक्स लिया जाता है। प्रत्येक सीट पर 990 रुपये के हिसाब से टैक्स लगाया जाता है। वहीं, लोडर व बड़े वाहनों से सालाना टैक्स लिया जाता है। निजी वाहन का टैक्सी के रूप में संचालन करने वाले वाहन चालकोें पर 29 हजार रुपये तक जुर्माना भी है। हर माह ऐसी करीब 10-15 कारों पर विभाग कार्रवाई कर जुर्माना भी लगाता है।
वर्जन :
निजी वाहनों का टैक्सी के रूप में संचालन नहीं होने दिया जा रहा है। हर माह चेकिंग अभियान चलाकर इन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। जल्द फिर से अभियान चलाकर इन्हें बंद कराया जाएगा। - वीरेंद्र सिंह, एआरटीओ