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एफआईआर दर्ज होने पर भड़के किसान, बोले- पराली जलाने पर कार्रवाई ठीक, पर संसाधन भी तो मुहैया कराओ

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अमरिया क्षेत्र के एक खेत में पराली। - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। पराली जलाने पर इस बार प्रशासन सख्ती से करने का मूड बना चुका है। एक दिन पहले अमरिया तहसील क्षेत्र के कटैइया पंडरी गांव में किसान रंजीत सिंह के खेत में पराली जलाने का मामला पकड़ा गया था। इस पर डीएम ने किसान पर एफआईआर दर्ज कराई थी। लेखपाल, सचिव, किसान सहायक को निलंबित कर दिया था। ग्राम प्रधान को पंचायती राज एक्ट के तहत नोटिस भेजा था। पराली जलाने वाले किसान को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में पराली जलाने से रोकने को अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा चुकी है। कार्रवाई के बाद प्रशासनिक अमला अलर्ट हो चुका है, लेकिन किसान प्रशासन की सख्ती के बीच खुद के लिए रियायत चाहता है। उसका कहना है कि प्रशासन पराली जलाने वालों पर कार्रवाई करे, लेकिन पराली नष्ट करने को संसाधन मुहैया कराने पर भी जोर दे। किसानों की दिक्कत को भी समझा जाए। किसानों को मिलने वाली मदद कागजों में तो बेहतर दिखाई देती है, मगर धरातल पर उसके कोई मायने नहीं है। अमर उजाला ने किसानों से बातचीत की तो उन्होंने अपना पक्ष खुलकर रखा और प्रशासन से धरातल पर मदद दिलाने की गुहार भी लगाई।
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साल 2019 में हुई कार्रवाई
- 368 पराली जलाने के मामले आए प्रकाश में।
- 114 एफआईआर दर्ज की गई।
- 19 किसानों की पराली जलाने पर हुई गिरफ्तारी।
- 20.45 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया।
- 13.17 लाख रुपये जुर्माना वसूला।
प्रशासन का किसानों को सुझाव
पराली जलाने के बजाय उसे अन्य तरीकों से नष्ट करने को प्रशासन ने किसानों को सुझाव दिया है। डीडी कृषि यशराज सिंह ने बताया कि किसान फसलों की कटाई कंबाइन, हार्वेस्टिंग, मशीन विद एसएमएस से कर सकते हैं। इसके अलावा स्ट्रा रीपर, विद वाइडर, एमबी प्लाऊ बेलर, रेक, सुपर सीडर आदि यंत्रों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
ये तय की गई है पराली जलाने पर कार्रवाई
पराली जलाने से रोकने के लिए ग्राम प्रधान से लेकर जनपद स्तरीय अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है। सेटेलाइट से भी निगरानी की जा रही है। पराली जलाने पर किसान पर एफआईआर के अलावा जुर्माना भी लगेगा। दो एकड़ तक ढाई हजार, पांच एकड़ तक पांच हजार और इससे अधिक पर 15 हजार रुपये प्रति घटना के हिसाब जुर्माना लगेगा। राजस्व, कृषि और पुलिस विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी मामला सामने आने पर कार्रवाई होगी।
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पराली जलाने के ये मुख्य नुकसान
- जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण होगी।
- जमीन के लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु नष्ट होते हैं।
- वायु प्रदूषण में बेहताशा बढ़ोतरी होती है।
- मिट्टी की भौतिक, रासायनिक और जैविक संरचना में नुकसान।
वेस्ट डिकंपोजर या मल्चर के माध्यम से सड़ाकर जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करें
पीलीभीत। पराली के उचित प्रबंधन को बुधवार को डीएम पुलकित खरे ने जनपद के 155 कस्टम हायरिंग सेंटर एवं फार्म मशीनरी बैंक के प्रभारियों संग बैठक की। गांधी प्रेक्षागृह में हुई बैठक में डीएम ने कहा कि सरकार ने कृषि उपकरणों पर अनुदान प्रदान करते हुए लाभांवित किया है। ग्राम प्रधानों के साथ बैठक कर निर्धारित दरों पर किसानों को पराली प्रबंधन से संबंधित उपकरण मुहैया कराए जाएं। पराली को काटकर मिट्टी में मिलाने का काम करें। पराली को वेस्ट डिकंपोजर या मल्चर के माध्यम से सड़ाकर जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करें। ऐसा करने से जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी। फार्म मशीनरी बैंक के लिए चयनित 39 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान और सचिवों को तीन दिन में उपकरण खरीदने के निर्देश दिए। 18 सहकारी समितियों, छह गन्ना समितियों का भी चयन फार्म मशीनरी बैंक को किया गया। अगर कहीं पराली जलाने की घटना प्रकाश में आती है तो संबंधित की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी और रजिस्ट्रेशन निरस्त होगा। सीडीओ श्रीनिवास मिश्र, डीडी कृषि यशराज सिंह, जिला कृषि अधिकारी डॉ. विनोद कुमार, जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र कुमार मिश्रा आदि मौजूद रहे।
पराली को पशुओं के चारे में प्रयोग में लाएं
पराली जलाने से रोकने के लिए प्रशासन ने उसे पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया। डीएम ने कहा कि किसान नजदीक की गोशाला मेें पराली काटकर पहुंचाए। कटाई और ढुलाई का खर्च ग्राम पंचायत उठाएगी।
पराली जलाने पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। पराली नष्ट करने के लिए किसानों को कई तरीके भी बताए गए हैं। इसे लेकर जागरूक भी कराया जा रहा है। अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। - पुलकित खरे, डीएम
पराली जलाने वाली खबर में किसानों से बातचीत
किसानों का प्रति एकड़ खर्च बढ़ गया
जिस तरह के इंतजाम किए गए हैं, उससे किसानों का प्रति एकड़ 600 रुपये खर्च बढ़ गया है। कृषि यंत्रों पर सब्सिडी की बात धरातल पर कामयाब नहीं हो सकी है। इसकी हकीकत भी संबंधित दुकानों पर जाकर पता की जा सकती है। खर्च अधिक होने की वजह से हर किसान उसे वहन नहीं कर सकता। - प्रशांत शुक्ला, ड्यूनी डैम
प्रशिक्षण देकर संसाधन मुहैया कराएं
पराली खेत में पड़ी होने की वजह से जुताई में परेशानी होती है। पराली सड़ने में काफी समय लगता है। ऐसे में गेहूं की बुआई में देरी होती है। पराली जलाने पर अगर पाबंदी लगानी है तो धीरे-धीरे लगाएं। किसान को पराली नष्ट करने का प्रशिक्षण दें और संसाधन भी मुहैया कराएं। - सुखप्रीत सिंह, हरीपुर उदयपुर
कारखानों पर भी कसें शिकंजा
पराली की वजह से खेत बराबर नहीं रहता। एसएमएस लगे कंबाइन से धान कटवाने पर खर्च अधिक होता है। प्रति एकड़ दो-तीन क्विंटल धान खेत में ही गिर जाता है। पराली जलाने पर पाबंदी तो ठीक है, मगर प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों पर भी प्रतिबंध लगाकर सख्ती करें। समर्थन मूल्य दिलाने में भी गंभीरता दिखाई जाए। - पाल सिंह, सुंदरपुर
किसानों पर एफआईआर कराना गलत
खेतों में पराली जलाए जाने पर प्रतिबंध लगाया जाना पर्यावरण संरक्षण के लिए हितकर है, लेकिन पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर कराना और उन्हें सुविधाएं न दिया जाना उचित नहीं। किसान को संसाधन मुहैया कराए जाने चाहिए। प्रदूषण की अन्य वजहों पर भी सख्ती करें। - सूर्यप्रकाश गंगवार, साबेपुर
किसानों को प्रताड़ित करना गलत
खेतों में पराली जलाने पर वातावरण प्रदूषित होता है। इस पर रोक लगाना भी गलत नहीं, मगर किसानों का इसकी आड़ में शोषण करना गलत है। किसान पहले ही परेशान है। प्रशासन ऐसे इंतजाम करें कि किसान को पराली जलानी ही न पड़े। सिर्फ कागजों में ही व्यवस्था न बनाई जाए। वह जमीन पर भी दिखे। - सर्वेश कुमार, कृषक गांव चौखंडी।
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