ग्रामीणो से तेदुए के बारे में जानकारी करते वन कर्मी । संवाद
कलीनगर। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुए की बढ़ती संख्या जहां जिले को देश में पहचान दिला रही है, वहीं जंगल से सटे सेल्हा गांव में दहशत का कारण बनी हुई है। आए दिन आबादी में घुसकर बाघ और तेंदुआ पालतू पशुओं का शिकार कर रहे हैं। टाइगर रिजर्व के अफसरों के लापरवाह रैवये के चलते महज एक वन रक्षक और दो वाचरों के सहारे निगरानी कराई जा रही है। ये भी अफसरों को लोकेशन की फोटो भेजकर चले जाते हैं।
टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के जंगल में बाघ और तेंदुओं की अच्छी संख्या है। जंगल के नजदीक कई गांव बसे हैं। इनमें अक्सर वन्यजीवों की चहलकदमी बनी रहती है, लेकिन विभाग की ओर से तारकशी नहीं कराई है। दस दिन पूर्व तेंदुआ सेल्हा गांव से एक बच्ची को खींचकर ले गया था। बाद में उसका शव मिला था।
इसके बाद अफसरों ने तार फेंसिंग कराने के दावे किए थे, लेकिन शुरुआत में गंभीरता बरतने के बाद लापरवाही हावी होने लगी। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के साथ तेंदुए की क्षेत्र में सक्रियता बढ़ गई है, लेकिन वन अफसर लापरवाह बने हुए हैं। वन विभाग ने गांव के बाहर तेंदुआ और बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा भी लगाया है, लेकिन दोनों ही इसके पास भी नहीं फटक रहे हैं।
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बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे ग्रामीण
सेल्हा गांव निवासी सोनू और दयाल का कहना है कि गांव का रास्ता जंगल के नजदीक से ही है। स्कूल समेत अन्य कार्यों से बच्चे भी आते-जाते हैं। तेंदुए की चहलकदमी से दशहत है। ग्रामीण शाम को घरों से बाहर निकलने से बच्चों को रोक रहे हैं।
ग्रामीणो से तेदुए के बारे में जानकारी करते वन कर्मी । संवाद