जिला
पंचायत व क्षेत्र पंचायत पद के लिए कुछ दिन पहले संपन्न हुए चुनाव में
वासुपुर में व तीसरे चरण में चौसर हरदो पट्टी में मारपीट, पथराव व फायरिंग
की घटना से प्रशासन ने सबक लिया। चौथे चरण के चुनाव के लिए ऐसी रणनीति
बनाई, इसमें चिक चिक तो हुई लेकिन लठ्ठम-लठ्ठ की नौबत नहीं आई और शांति की
पताका लहर गई।
पंचायत चुनाव में
ऐसा होता है। जिसमें एक एक वोट के लिए मारामारी होती है। प्रत्याशी और
उनके समर्थक जीत के लिए साम दाम दंड भेद सभी हथकंडे अपनाते हैं। वहीं
प्रशासन के सामने शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न कराने की चुनौती।
पिछले पंचायत
चुनाव में क्षेत्र के वासुपुर में एक वोटर को लेकर मारपीट, पथराव व फायरिंग
हुई। चुनाव के तीसरे चरण में बीसलपुर के चौसर हरदोपट्टी में प्रत्याशी
समर्थकों में मारपीट व फायरिंग हुई।
इसमें एक पक्ष के दो लोग घायल भी हुए।
इन घटनाओं से सबक ले चुके प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से सबसे संवेदनशील व
जिले के सबसे बड़े ब्लाक में जिसकी एक सीमा नेपाल से मिलती है, शांति के
साथ चुनाव निपटाने की व्यूह रचना की।
केवल कोतवाली क्षेत्र में ही 1860
लोगों के खिलाफ मुचलका पाबंद की कार्रवाई की गई, वहीं 250 के खिलाफ
शांतिभंग की आशंका की कार्रवाई, 120 लोगों को लालकार्ड थमाएं। इसके परिणाम
स्वरूप ऐसी कोई घटना नहीं हुई।
जिससे प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें
हो और जवाब देने की स्थिति पैदा हो। यही वजह रही कि बुधवार को संपन्न मतदान
के दौरान चिक चिक तो अधिक रही लेकिन लठ्ठम-लठ्ठ की नौबत नहीं आई।
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