समाज में पुलिस की छवि बहुत अच्छी नहीं मानी जाती है, लेकिन
खाकी वालों में भी संवेदना होती है। यह बात, बरेली में जिंदगी और मौत से
जूझ रहे पीलीभीत जिला जेल के बंदी को दो यूनिट ब्लड देकर पुलिस ने साबित कर
दिया। जबकि उसके अपनों ने खून देने से इंकार कर दिया था।
थाना
माधोटांडा के गांव अकबरपुर निवासी मंजीत उर्फ मनिया के खिलाफ थाना
माधोटांडा में दुराचार, गैंगस्टर व हजारा थाना में मारपीट व धमकी देने के
मामले दर्ज हैं। इन मामलों में वह एक मार्च 14 से जिला जेल में निरुद्ध है।
टीवी की शिकायत होने पर जेल प्रशासन ने उसे 14 मई 15 को जिला अस्पताल में
भर्ती कराया था। जहां से डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल बरेली रेफर कर दिया।
जेल अधीक्षक विजय सिंह ने बताया कि दो दिन पहले डॉक्टरों ने उसके
फेफड़ों का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने दो यूनिट आरएच फैक्टर
‘ओ’ पॉजिटिव ब्लड चढ़ाने की जरूरत बताई थी। जेल अधीक्षक के मुताबिक बंदी के
घरवाले ब्लड देने को तैयार नहीं हुए। इस पर उन्होंने एसपी जेके शाही को
मामले की जानकारी दी।
एसपी ने मामले को गंभीरता से लिया और ओ पॉजिटिव
ब्लड वाले पुलिस लाइंस में तैनात सिपाही वसीम और पूरनपुर कोतवाली के सिपाही
राहुल को रविवार को बरेली भेज दिया। जेल अधीक्षक ने बताया कि दोनों
सिपाहियों ने ब्लड देकर बंदी की जान बचाई।
जेल
अधीक्षक ने बताया था कि बंदी को ब्लड की जरूरत है, लेकिन इंतजाम नहीं हो
पा रहा है। इस पर दो सिपाहियों को मैने बरेली भेजा था। जिन्होंने ब्लड
डोनेट किया है।
- जेके शाही, एसपी
ब्लड देने से चेहरे पर आती है चमक
अधिकांश
लोगों में यह भ्रम होता है कि ब्लड दान करने से उनको कमजोरी होगी और वह
अस्वस्थ हो जाएंगे। जबकि डॉक्टरों के मुताबिक जो व्यक्ति दूसरे को ब्लड दान
देता है उससे उसके शरीर में नया खून बनता है जिससे उसके शरीर में रोग
प्रतिरोधक क्षमता मजबूत तो होती ही है साथ ही चेहरे की चमक भी बढ़ जाती है।
नहीं होती खून की कमी
लोगों
में यह भी भ्रम होता है कि वह जैसे ही ब्लड दान देंगे उनके शरीर में खून
की कमी हो जाएगी। जबकि खून देने के कुछ ही देर में शरीर में उतना ही खून बन
जाता है जिसे गाढ़ा होने में कुछ समय जरूर लगता है।