पीलीभीत। गरीबों की समस्याओं का त्वरित निदान हो, इसको लेकर सरकार की मंशा के अनुरूप संपूर्ण समाधान दिवसों का आयोजन किया जाता है, लेकिन अपने जिले में स्थिति ठीक उलट है। यहां गरीबों के प्रार्थना पत्रों को तो महीनों तवज्जो नहीं दी जाती है, लेकिन खनन मामले में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा 24 घंटे ही अनुमति दे दी जाती है। ऐसे में कोसों दूर का सफर तय कर तहसील दिवस में पहुंचने वाले गरीबों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
समस्याओं को लेकर अफसरों की चौखट पर पहुंचने वाले फरियादियों को न्याय नहीं मिल रहा था। दर-दर भटक रहे फरियादियों को एक ही दिन में एक ही छत के नीचे उन्हें न्याय मिल सके। इसी मंशा के चलते सरकार ने प्रत्येक माह के पहले मंगलवार और तीसरे मंगलवार को संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित करने का निर्णय लिया था। इन संपूर्ण समाधान दिवसों में डीएम-एसपी से लेकर अन्य विभागों के अफसरों को भी मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिले की सदर तहसील, पूरनपुर, बीसलपुर, कलीनगर और अमरिया में हर माह पहले मंगलवार और तीसरे मंगलवार को संपूर्ण समाधान दिवसों का आयोजन तो किया जा रहा है, लेकिन समाधान दिवसों में अफसरों के टालमटोल वाले रवैये के चलते चंद फारियादियों की शिकायतों का ही मौके पर निस्तारण किया जाता है। जो शेष शिकायत बचती हैं उन्हें संबंधित विभागों के अफसरों को थमा दिया जाता है। अब इन शिकायतों का कब तक निस्तारण होगा, इसकी कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। कई मामलों में फरियादियों को महीनों लग जाते हैं, लेकिन उनका निस्तारण नहीं हो पाता है।
...खनन के लिए 24 घंटे में मिल जाती है अनुमति
संपूर्ण समाधान दिवस में भले ही गरीबों की समस्याओं का त्वरित निस्तारण न हो, लेकिन रसूखदार माफिया को आगे हुक्मरान भी नतमस्तक हो जाते हैं, उनके कामों को प्राथमिकता के तौर पर घंटों में ही पूरा करने की पुरजोर कोशिश करते हैं। बानगी के तौर पर बीसलपुर के ढुकसी गांव में बालू खनन के मामले में गौर करें तो यहां एक किसान ने खेत में जमा बालू के खनन की निकासी के लिए आवेदन किया था। इस मामले में लेखपाल से लेकर कई उच्चाधिकारियों ने महज 24 घंटे में ही अपनी-अपनीे रिपोर्ट लगाते हुए 81000 घनमीटर बालू खनन करने की अनुमति दी गई। किसान की अनुमति की आड़ में एक माफिया ने जेसीबी और पोकलैंड मशीनें लगाकर आनन फानन में खनन शुरू करा दिया। माफिया ने अपनी मनमर्जी करते हुए नदी की छाती को भी छलनी करते हुए सैकड़ों ट्रॉली बालू रातोंरात उड़ा दी। मामला मीडिया में सुर्खियां बना तो अफसर ही अब माफिया को बचाने में जुटे हुए हैं।
समाधान दिवसों में आई शिकायतों को कोई पुरसाहाल नहीं
शिकायतों के निस्तारण को प्रत्येक माह में पहले और तीसरे मंगलवार को पंाचों तहसीलों में संपूर्ण समाधान दिवस में प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्या सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को शिकायतों के निस्तारण के निर्देश देते हैं। गत वर्ष के अक्तूबर माह के तीसरे मंगलवार को पांचों तहसीलों में 85 शिकायतों आई थीं। इनमें मात्र आठ शिकायतों का ही शिकायत किया गया। नवंबर के पहले मंगलवार को 100 शिकायतें आईं, लेकिन अफसरों की फौज मात्र सात शिकायतों का ही मौके पर निस्तारण कर सकी। इसी माह के तीसरे मंगलवार को आईं 111 शिकायतों में मात्र सात शिकायतें ही निस्तारित हुईं। इसी तरह दिसंबर के पहले मंगलवार को बीसलपुर में 69 और कलीनगर में 15 शिकायतों आईं। दोनों तहसीलों में मात्र 19 शिकायतें ही निस्तारित की गईं। तीसरे मंगलवार को सौ शिकायतों में मात्र सात और जनवरी के पहले मंगलवार को डीएम की अध्यक्षता में लगे समाधान दिवस में मात्र दस शिकायतें ही पहुंचीं। सदर तहसील में 52 शिकायतों में मात्र चार ही निस्तारित की गईं।
केस एक
शिकायतों का नहीं होता निस्तारण
बीसलपुर के गंाव परसिया निवासी लवकुश गंगवार ने गांव के गन्ना क्रय केंद्र को सुचारू रुप से चलवाने को समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दिया था। इस केंद्र के चलने से किसानों को कई किमी दूर गन्ना ले जाना पड़ता है। समाधान न होने पर कई समाधान दिवसों में प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
केस दो
समाधान दिवसों में हो रही मात्र खानापूरी
पूरनपुर निवासी राजेंद्र आर्या ने नगर की खराब प्रकाश, सफाई व्यवस्था को लेकर संपूर्ण समाधान दिवस मेें पिछले साल 24 बार शिकायत की। बगैर बुलाए हर बार शिकायत को फर्जी ढंग से निस्तारण कर दिया गया। राजेंद्र आर्या ने कहा कि संपूर्ण समाधान दिवस में मात्र खानापूरी की जा रही है।
केस तीन
नहीं होती कोई सुनवाई
बिलसंडा के गांव कनपरी निवासी अमित कुमार ने गत वर्ष मुद्रा लोन न मिलने पर अपनी समस्या समाधान दिवस में रखी। अधिकारियों के आश्वासन पर भी सुनवाई नहीं हई। वह कहते हैं कि कई बार प्रार्थना पत्र दे चुका हूं, लेकिन आज तक मुद्रा लोन नहीं मिला।