पीलीभीत। उपकोषागारों में वित्तीय अनियमितताएं रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। अब उपकोषागारों में उप कोषाधिकारी की गैर मौजूदगी में स्टांप की बिक्री नहीं की जाएगी। अगर उपकोषाधिकारी अवकाश पर हैं या फिर उनका तबादला हो चुका है तो स्टांप की बिक्री नहीं होगी।
वरिष्ठ कोषाधिकारी रेनू बौद्ध ने बताया कि किसी भी उपकोषागार में स्टांप की बिक्री तभी होगी, जब उसमें नियमित उपकोषाधिकारी तैनात हो। नियमित उपकोषाधिकारी का पद रिक्त होने की दशा में स्टांप की बिक्री नहीं की जाएगी। इसके अलावा किसी भी उपकोषागार में स्टांप की बिक्री नकद नहीं की जाएगी। स्टांप खरीदने वाले को बैंक के चालान के माध्यम से वेंडर को रुपये अदा करने पड़ेंगे। बैंक से चालान प्राप्ति की पुष्टि के बाद उपकोषागार से निर्धारित प्रक्रिया पालन करने के बाद ही स्टांप की बिक्री संभव होगी। जिन तहसीलों में उपकोषागार तैनात नहीं हैं, तब तक वहां स्टांप की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। नए उपकोषागार की तैनाती होने तक स्टांप सिंगल लाँक के बजाय डबल लॉक में रखे जाएंगे। जिला कोषाधिकारी ने बताया कि इसमें कोताही बरतने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।