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जरा सी चूक से बढ़ जाएंगी मुश्किलें

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शारदा नदी के आसपास गांवों के किसान पहले ही नेपाली हाथियों की मार से त्रस्त है। छह नेपाली हाथी पहले ही किसानों की दर्जनों एकड़ धान और गन्ने की फसल को रौंद चुके हैं। अब शारदा पार कर टाइगर रिजर्व के बड़े जंगल हरीपुर रेंज पहुंचे हाथियों के झुंड ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अभी ये हाथी हालांकि आबादी क्षेत्र से दूर हैं, लेकिन वन विभाग की जरा सी चूक दो दर्जन गांवों में रहने वाले किसानों पर भारी पड़ सकती है। अगर आबादी क्षेत्र में हाथियों का झुंड घुस गया तो उसे रोकना वन विभाग की टीम के लिए आसान नहीं होगा। शारदा नदी किनारे 100 एकड़ से ज्यादा खड़ी गन्ने और धान की फसल नष्ट होने का खतरा भी मंडरा रहा है। इसलिए वन विभाग को जल्द ही नेपाली हाथियों के झुंड पर काबू पाना होगा।
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वन विभाग के सूत्रों की मानें तो अभी छोटे-बड़े 14 हाथी टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र में चहलकदमी कर रहे हैं। अगर हाथियों के झुंड को वापस शारदा पार नहीं खदेड़ा गया तो यह आबादी इलाके में घुसकर कभी भी कहर बरपा सकते हैं। जिस स्थान पर हाथी मौजूद है, वहां से दो किमी दूर गजरौला खास गांव है। इस गांव में सबसे पहले हाथियों के झुंड के घुसने का खतरा है। यहां नेपाली हाथी न केवल आबादी में घुसकर भारी उत्पात मचा सकते हैं, बल्कि फसल को भी बड़े पैमाने पर रौंद सकते हैं। नेपाल की ओर से हाथियों का शारदा नदी पार आना यूं तो दशकों से है, लेकिन अब तक लग्गा भग्गा के जंगल में ही हाथी रुके रहते थे। शारदा नदी पार भारतीय सीमा में हाथियों की दस्तक खतरनाक मानी जाती है। तीन माह पूर्व नेपाल के दो हाथी शारदा नदी पार कर महोफ के जंगल में घुस गए थे। वन विभाग की निगरानी में चूक होने के चलते हाथियों ने अमरिया क्षेत्र की ओर रुख किया। इसके बाद बरेली और रामपुर सीमा में घुस गए। इन हाथियों ने डेढ़ माह तक उत्पात मचाया था। हाथियों के हमले में तीन लोगों की जान भी चली गई थी। बेहोश कर हाथियों को पुन: टाइगर रिजर्व के रास्ते ही वापस भेजा गया था। इधर एक बार फिर हाथियों के झुंड ने शारदा नदी को पार कर हरीपुर रेंज के जंगल में दस्तक दे दी है। इस बार हाथियों की संख्या भी पहले से अधिक है। हाथियों के झुंड में उनके दो छोटे बच्चे भी शामिल है। ऐसे में विभाग के लिए हाथियों के इस झुंड को खदेड़ना भी काफी मुश्किल होगा।
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