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मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ग्रामीणों का सहयोग जरूरी

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मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए रविवार को टाइगर रिजर्व के तत्वाधान में वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की ओर से रविवार को एक बरातघर में मानव-वन जीव संघर्ष: कारण और निवारण विषयक हुई कार्यशाला में वन कर्मियों के अलावा जंगल से सटे संवेदनशील गांवों के जागरूक लोगों ने भाग लिया। सभी का कहना था कि मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ग्रामीणों का सहयोग जरूरी है।
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कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एच. राजा मोहन ने कहा कि मानव- वन्यजीव संघर्ष का मुख्य कारण तृणभोजी वन्यजीवों के भोजन की तलाश में जंगल से बाहर आने को मुख्य वजह मानी जा रही है। इनका पीछा करते हुए शिकार के लिए मांसाहारी वन्यजीव भी आबादी के निकट पहुंच रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। तारफेंसिंग भी कराई जा रही है, लेकिन जंगल से सटे गांव के ग्रामीणों व किसानों को भी जागरूक होना चाहिए। सुविधानुसार खेतों की सीमा पर कपड़ा या तार फेंसिंग करें। वन्यजीवों की सबसे खूबसूरत प्रजाति बाघ है जो विश्व के कई देशों में विलुप्त हो रहे हैं।
डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने कहा कि जंगल से बाहर वन्यजीवों की चहलकदमी को ध्यान में रखकर विभाग लगातार काम कर रहा है। जंगल से बाहर वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर तत्काल उसकी जानकारी दें। कहा कि वन्यजीवों का रेस्क्यू करने के दौरान ग्रामीण वन विभाग का सहयोग करें। डब्ल्यूटीआई के प्रोजेक्ट हेड प्रेमचंद पांडे ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए जरूरी है कि ग्रामीणों के बीच तालमेल बढ़ाया जाए। उनसे सीधा संवाद किया जाए। पर्यावरण को बचाने के लिए वन्यजीवों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। कार्यशाला में रेंजर सत्येंद्र कुमार चौधरी, मोहम्मद आरिफ, वन दरोगा मोहित सिंह के अलावा मुख्यालय के प्रमोद कुमार, सर्वेश कुमार सुमित स्टाफ मौजूद रहा।
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