पीलीभीत। अफसरों की सख्ती उनके लचर सिस्टम के आगे दिखावा बनकर रह गई है। आलम यह है कि एक तरफ डीएम कार्रवाई का आश्वासन देते है तो वहीं दूसरी तरफ अधीनस्थ अफसरों की कार्यप्रणाली में बदलाव नहीं दिखता। यही वजह है कि जिला अस्पताल में जिनकी तैनाती है वे किराएदार होकर रहकर गए है। जिनका रिटायरमेंट व ट्रांसफर हो गया उनका आवास पर लंबे समय बाद भी कब्जा बना हुआ है। डीएम ने पिछले दिनों शिकायत मिलने पर एसडीएम सदर को जांच करने और आवासों का आवंटन करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस पर कोई करवट नहीं ली गई।
जिला अस्पताल परिसर में डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों के रहने के लिए आवास बने हैं। वर्तमान में आवासों का मामला काफी गंभीर है। वैसे तो आवासों का आवंटन नियमानुसार महिला और पुरुष अस्पताल के सीएमएस को करना चाहिए। लेकिन मनमुटाव के चलते ऐसा नहीं हो पा रहा है। मनमानी तरीके से आवासों का आवंटन होने से जिले में तैनात कर्मचारियों को आवास की सेवा नहीं मिल पा रही है। अफसरों की सुस्ती का आलम यह है कि कई आवासों पर रिटायरमेंट और ट्रांसफर हो चुके कर्मियों का कब्जा है। यहां तैनात कर्मचारी आवास न होने पर किराए पर रहने को मजबूर है। पिछले दिनों डीएम वैभव श्रीवास्तव से महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने इस मामले की शिकायत की। जिस पर डीएम ने एसडीएम सदर को आवासों की स्थिति को देखकर कर्मचारियों को आवास आवंटन करने के निर्देश दिए पर जांच पड़ताल तो दूरे मौके पर जाकर आवासों की स्थिति देखना तक मुनासिब नहीं समझा गया। इधर, सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया का कहना है कि आवास आवंटन का अधिकार क्षेत्र तय होना चाहिए। अब तक आवंटन पुरुष अस्पताल के सीएमएस करते हैं। इससे उनके अस्पताल के कर्मचारियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। आवंटन 60 और 40 फीसदी के अनुसार होना चाहिए।
मुझे इस प्रकरण की जानकारी नहीं है। लिहाजा इस प्रकरण से संबंधित कोई भी जानकारी डीएम ही दे सकेंगे।
-वंदन त्रिवेदी, एसडीएम, सदर