वर्तमान पेराई सत्र धीमा चलने के कारण अब बरखेड़ा चीनी मिल का गन्ना जिले
के दूसरे चीनी मिलों को भेजा जाएगा। इस बाबत जिलाधिकारी ओएन सिंह ने बताया
कि दूसरे गन्ना मिलों को गन्ना आपूर्ति करने के लिए जिला गन्ना अधिकारी को
निर्देश जारी कर दिए हैं।
बरखेड़ा स्थित बजाज चीनी मिल भुगतान के मामले
में सबसे फिसड्डी है। मिल द्वारा अभी तक 15 दिसंबर तक खरीदे गए गन्ने का
भुगतान किया गया है जबकि एलएच शुगर मिल 12 फरवरी और दोनों सहकारी मिलें 20
जनवरी तक का गन्ना मूल्य भुगतान कर चुकी हैं। यही नहीं बरखेड़ा मिल का
पेराई सत्र भी धीमे चल रहा है।
ऐसे में समय रहते किसानों का गन्ना समय से
नहीं खरीदा जा सकेगा। समय से खरीद नहीं होने पर गन्ना सूखने भी लगेगा। किसानों
को नुकसान से बचाने के लिए डीएम ने जिला गन्ना अधिकारी से बरखेड़ा की बजाज
मिल का कुछ गन्ना जिले के अन्य मिलों को देने के निर्देश दिए हैं। जिला
गन्ना अधिकारी (डीसीओ) राजेश्वर यादव ने बताया कि अभी उन्हें आदेश नहीं
मिला है। आदेश मिलने पर अन्य मिलों को गन्ना देने की कार्रवाई की जाएगी।
बजाज मिल किसानों को दे रहा चीनी
गन्ना
भुगतान न करने पर प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद बजाज मिल, किसानों को चीनी
दे रही है। इसमें खरीदे गए गन्ना मूल्य के बदले किसानों को पर्चियां दी जा
रही हैं। जिस पर किसान थोक बाजार भाव पर चीनी ले रहे हैं। इसके बाद चीनी को
व्यापारियों को बेचकर नकद पैसा पा रहे हैं।
बिचौलियों की पौ बारह
बजाज
मिल पर किसानों को दी जा रही चीनी से बिचौलियों की पौ बारह है। मिल
प्रबंधन की मिलीभगत से बड़ी संख्या में व्यापारी और बिचौलियां मिल गेट पर
किसानों को घेरे रहते हैं। चीनी प्राप्त करने को मिली पर्ची किसानों से
लेकर निर्धारित रेट से 100 प्रति क्विंटल की कम मूल्य दर से नकद धनराशि दे
रहे हैं। बाद में इस पर्ची के माध्यम से मिल से वह स्वयं चीनी प्राप्त कर
लेते हैं। चीनी खरीद के इस खेल में बिचौलिए चांदी काट रहे हैं।