बिलईखेड़ा गांव में स्थित टीले को देखते समाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप।स्रोत:स्वयं
पीलीभीत। जहानाबाद क्षेत्र के बिलईखेड़ा स्थित कई एकड़ में फैले टीले की अनदेखी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता ने रिपोर्ट बनाकर प्रशासन के अलावा इतिहासकार और पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को भेजी है। यहां जेसीबी से खोदाई का विरोध करते हुए टीले का संरक्षण करने की मांग की।
सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट शिवम कश्यप ने बताया कि जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित जहानाबाद कस्बे के निकट स्थित बिलईखेड़ा और पसियापुर इलाके में कई एकड़ जमीन ऐसी है, जो 15-20 फीट ऊंचे टीले की तरह है। शिवम कश्यप का कहना है कि उक्त जमीन का इतिहास हैं। अलेक्जेंडर कनिंघम ने वर्ष 1862-63 में लिखी भारत की प्रथम पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट में भी इस स्थान का जिक्र है। उस समय काल में इस टीले की ऊंचाई करीब 20 फीट थी।
शिवम ने बताया कि यहां प्राचीन बसावट के अवशेष मिले हैं। इसको लेकर प्रशासनिक अफसरों को भी अवगत कराने के साथ कई विद्वान इतिहासकारों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से भी स्थलीय निरीक्षण कर उक्त टीले के इतिहास व महत्व के अनावरण करने के लिए पत्राचार किया गया है।
राजमार्ग निर्माण के लिए खोदी जा रही मिट्टी शिवम का कहना है कि टीले के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से कार्य कराया जा रहा है। इसमें पटान व अन्य कार्यों के लिए मिट्टी की आपूर्ति के लिए इस टीले का व्यवसायिक उत्खनन किया जा रहा है। इस वजह से टीला जीर्ण-शीर्ण होता जा रहा है। वहीं, खजाने की अफवाह से स्थानीय लोग भी टीले की खुदाई कर रहे हैं।