Open clerk fraud in deliberations
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वक्फ की 430 एकड़ जमीन को डीएम के फर्जी हस्ताक्षर कर अपने नाम दर्ज कराने के मामले में अब जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय का एक लिपिक पुलिस की रडार पर है। उसकी मिलीभगत से जालसाजी की इस वारदात को आसानी से अंजाम दिया गया। विवेचना में सामने आए तथ्यों के बाद विवेचक ने अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से मामले से जुड़े कई अभिलेख तलब किए हैं।
अमरिया के फुलैइया गांव में वक्फ बोर्ड की 430 एकड़ भूमि है। इस जमीन को शहर के तसलीम हसन खान को वक्फ बोर्ड का प्रबंधक दर्शाकर उनके नाम कर दिया गया। इसमें तत्कालीन डीएम मासूम अली सरवर के हस्ताक्षर किए हुए एक आदेश के तहत करने की बात कही गई। मामला संज्ञान में आने पर डीएम शीतल वर्मा ने पिछले दिनों जांच कराई। जिसमें तत्कालीन डीएम मासूम अली सरवर द्वारा इस तरह के आदेश पर हस्ताक्षर करने से अनभिज्ञता जताई गई। इसी के आधार पर कोतवाली थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की जांच क्राइम ब्रांच के एसआई एसके सिंह को दी गई। विवेचना के दौरान डीएम मासूम अली सरवर से उनका स्टेटमेंट मंगाया गया। जिसमें उन्होंने ऐसा कोई भी आदेश या हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। जिसके बाद मामले की जांच जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के कार्यालय तक पहुंच गई है। जिसमें वहीं के एक कर्मचारी की संलिप्तता उजागर हो गई है। पुलिस इसके लिए काफी साक्ष्य तैयार कर चुकी है। उधर, राजनैतिक दबाव बनाकर मामले को दबाने की कोशिशें भी तेज हो गई है। विवेचक एसके सिंह ने बताया कि जांच के दौरान यह स्पष्ट हो चुका है कि तत्कालीन डीएम मासूम अली सरवर के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें आरोपी के तौर पर लाभ लेने वाले और एक लिपिक नाम सामने आ रहा है। इसको लेेकर अभिलेख तलब किए गए है।