अमरिया क्षेत्र में पानी में डूबी धान की फसल।
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। पिछले कई दिनों से जिले में बाढ़ की स्थित बनी हुई है। शारदा और देवहा नदी बाढ़ से फसलों में पानी घुस गया है। तैयार खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान है। धान की गिरी फसल में पानी भरा रहा तो खराब हो सकती है। गन्ने की फसल को भी दस फीसदी नुकसान है।
जिले में एक लाख 14 हजार 270 हेक्टेयर धान और एक लाख दो हजार 114 हेक्टेयर गन्ना की फसल है। चार दिन पहले आई बाढ़ तक सिर्फ 20 फीसदी ही धान की कटाई हो पाई थी। बाकी खेतों में खड़ा था। बाढ़ के पानी ने धान की फसल को अपने आगोश में ले लिया। इससे खड़ी धान की फसल खेत में 55 फीसदी तक गिर गई है। इससे उस फसल को कृषि विभाग के अधिकारी खराब होने की संभावना जता रहा है। गिरी धान की फसल से अगर पानी नहीं निकला गया, तो पूरी तरह खराब हो सकती है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई। इसके अलावा खेतो ंमें खड़े गन्ने को बाढ़ ने प्रभावित किया गया है। बाढ़ के पानी से गन्ने की फसल को भी दस फीसदी नुकसान होने की संभावना है। जलस्तर कम जरुर हुआ है, मगर अभी तक खेतों से पानी नहीं निकला पाया है। सर्वे के बाद ही नुकसान का आकलन लगाया जा सकेगा।
क्या बोले: कृषि अधिकारी
करीब 18 से 20 फीसदी धान की फसल कट चुकी है। खड़ी धान की फसल 50 से 55 फीसदी गिर जाने से खराब होने की संभावना बन गई है। अगर खेत से पानी नहीं निकल पाया, तो धान जम जाएगा। दस फीसदी गन्ने की फसल को पूरनपुर और कलीनगर क्षेत्र में ही नुकसान है। - डॉ. वीके यादव, जिला कृषि अधिकारी