पूरनपुर। माघ पूर्णिमा पर रविवार को शारदा नदी में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और दान किया। इस दौरान घाट पर मेला लगा। पौष पूर्णिमा से एक महीने का चल रहा संतों का कल्पवास भी रविवार को समाप्त हो गया।
पौष पूर्णिमा से शारदा नदी के धनाराघाट पर एक महीने का संतों का कल्पवास शुरू हुआ था। घाट पर बसी रमनगरिया में एक महीने तक सुबह होते ही हर-हर गंगे का जयघोष होता रहा। शाम को साधु, संत भजन कीर्तन में रम जाते थे। नदी के घाट पर मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी पर मेला लगा। तमाम श्रद्धालुओं ने पहुंचकर नदी में स्नान कर दान किया। रविवार को माघ पूर्णिमा पर नदी में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला सुबह होते ही शुरू हो गया था। तमाम लोगों ने शारदा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर दान किया।
वहीं, रविवार को नदी तट पर 26 जनवरी से चल रहे रुद्र महायज्ञ का पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। इसके उपरांत भंडारा हुआ। इसमें तमाम श्रद्धालुओं ने सामूहिक भोज किया। बाबा राघवदास ने बताया कि माघ पूर्णिमा पर शारदा नदी तट पर एक महीने से चल रहा कल्पवास समाप्त हो गया। सोमवार को परवा है। मंगलवार को नदी घाट पर एक महीने तक कल्पवास करने वाले सातु, संत अपने आश्रमों को रवाना होंगे।